Shahjahanpur News: अधिकारियों की शह पर ठगे जा रहे उपभोक्ता
शाहजहांपुर। जनसुविधा केंद्र बंद होने के बाद नगर में चार अलग-अलग स्थानों पर बिजली बिल मारुति वैनों में कंप्यूटर सिस्टम के जरिये जमा किए जाते थे। अधिकारियों की शह पर लंबे समय से उपभोक्ता ठगे जा रहे हैं। बुधवार को बिलों में हेरफेर का मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। एक्सईएन ने तुरंत ही सदर थाने में तहरीर भिजवा दी। बृहस्पतिवार को पूरे दिन वैन नजर नहीं आईं।
शहर के बिलिंग स्पॉट सेंटरों के अलावा टाउन हाल, घंटाघर, चौक और रंगमहला आदि में बिजली का बिल जमा करने के लिए वैन खड़ी होती थीं। वैन में बैठा कर्मचारी कंप्यूटर सिस्टम के जरिये बिल की धनराशि लेकर रसीद उपलब्ध करा देता है। आमतौर पर वैनों को विद्युत निगम का ही माना जाता था।
बुधवार को कुछ उपभोक्ताओं ने बिल अदायगी के बाद भी पुरानी राशि जुड़ी होने की शिकायत एसई जेपी वर्मा से की तो उन्होंने समस्या का संज्ञान लिया। अभी जल्द ज्वाइन करने वाले एसई ने निगम द्वारा ऐसी कोई भी बिल जमा करने के लिए वैन लगाने से इन्कार करते हुए एक्सईएन के साथ जांच शुरू की। उन्होंने मौके पर जाकर पड़ताल की तो काॅमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिये बिल जमा होते मिले। अधिकारियों ने उपभोक्ता के बिल की धनराशि को विभाग के खाते में ट्रांसफर न करने पर नाराजगी जताई और वैनों को बंद करने के निर्देश दिए। इसके बाद एक्सईएन कार्यालय में संबंधित को बुलाकर फटकार भी लगाई, साथ ही थाने में तहरीर दी। बृहस्पतिवार को एक्सईएन ने खुद निरीक्षण किया। उन्हें कोई भी वैन पर बिल जमा होते नहीं मिले।
बिल जमाकर खाते में रुपये ट्रांसफर न कर उपभोक्ता को लगाते थे चपत
सीएससी के जरिये बिल जमा होने के बाद उसी दिन या अगले दिन विभाग के खाते में रुपया ट्रांसफर करने का नियम है। यह लोग कुछ प्रतिशत बिलों को रोककर शेष धनराशि को निगम के खाते भेज देते थे। सूत्र बताते हैं कि बड़े बिलों का भुगतान अपने खाते में रोककर उसकी ब्याज की राशि मिलने के बाद रुपया ट्रांसफर कर देते थे। इस बीच उपभोक्ता का दूसरा बिल बन जाने पर पुराना बिल जुड़कर आ जाता था। ऐसे में उपभोक्ता पर ब्याज लगने पर उसे नुकसान होता था।
वैन पर जमा रुपया बिल में कम न होने पर की शिकायत
सिविल लाइंस कॉलोनी निवासी विकास गुप्ता ने ऑनलाइन व उनके छोटे भाई ने घंटाघर स्थित वैन पर बिल जमा किया था। डबल बिल जमा होने की जानकारी होने पर जांच कराई तो ऑनलाइन बिल जमा मिला, जबकि वैन पर जमा बिल का पता नहीं चल सका। अगले महीने आए बिल में विकास के छोटे भाई द्वारा जमा रुपये भी कम नहीं किए। तब उनके पिता ने निगम के अधिकारियों से शिकायत दर्ज की। तब अफसरों ने संज्ञान लिया।
छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक वैन पर भेजते थे, अब खड़े किए हाथ
निगम के अधिकारी वैनों को अधिकृत नहीं मान रहे हैं। लेकिन यह सच नहीं है कि उन्हें वैनों पर बिल जमा होने की बात की जानकारी नहीं है। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक निगम के कर्मियों की हड़ताल, बिलिंग स्पॉट सेंटर पर तकनीकी कमी आने पर उपभोक्ताओं को वैन पर बिल जमा करने के लिए भेजते थे। अब हेरफेर का मामला संज्ञान में आने पर हाथ खड़े कर रहे हैं।
पार्ट पेमेंट करने के नाम पर मांगे जाते हैं 200 रुपये
वैनों पर उपभोक्ताओं से लेकर निगम तक को चपत लगाई जा रही है। वैन में लगे कंप्यूटर सिस्टम को चलाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। ट्रांसफार्मर या खुले तारों से अवैध रूप से कनेक्शन जोड़कर बिजली चोरी की जाती थी। वहीं दूसरी ओर निगम के कार्यालय में पार्ट पेमेंट की निशुल्क व्यवस्था है। वहीं सीएससी सेंटर पर इसके 200 रुपये मांगे जाते थे।
इनपुट
– 80 हजार हैं नगरीय उपभोक्ता
– 30 लाख औसतन निगम को मिलता है राजस्व
– 5 रुपये प्रति बिल सीएससी को मिलता है कमीशन
उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए निगम ने कई विकल्प दिए हैं। उसमें सीएससी भी है। उसका निगम से कोई संबंध नहीं है। उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने वालाें के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई।
– अरविंद कुमार, एक्सईएन सिटी

