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Shahjahanpur News: फसल बीमा आसान, मुआवजे में मशक्कत…, किसानों का मोह भंग

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Crop insurance is easy, compensation is difficult, farmers are disillusioned

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

शाहजहांपुर। मुआवजा पाने में कड़ी मशक्कत के कारण किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से दूरी बना रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ लेने के लिए रबी सीजन में पांच लाख किसानों में अब तक महज 1783 किसानों ने ही आवेदन किया है। जबकि अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।

अतिवृष्टि, सूखा पड़ने, ओला गिरने, आग लगने समेत दैवीय आपदा के कारण हर साल किसानों को फसल में नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों को क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। किसान बैंक, जनसुविधा केंद्र या बीमा कंपनी के जरिये फसल का बीमा करा सकते हैं। फसल बीमा के लिए खसरा, खतौनी, आधार कार्ड, बैंक खाता की जरूरत होती है। किसान को रबी या खरीफ की फसल में सिर्फ एक बार लागत का एक से डेढ़ प्रतिशत प्रीमियम के रूप में देना पड़ता है। इसके बाद किसान का किसी आपदा की वजह से नुकसान होता है तो केंद्र और राज्य के अंश के साथ संबंधित बीमा कंपनी फसल के नुकसान की भरपाई करती है। कृषि, राजस्व और बैंक कर्मचारी नुकसान का सर्वे करते हैं। क्षति का 50 प्रतिशत भुगतान तत्काल कर दिया जाता है। बावजूद किसान योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। बरसात में बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा खरीफ की फसलों को नुकसान का खतरा होता है।

किसानों को जागरूक नहीं कर पा रहा कृ़षि विभाग

बीमा योजना के बारे में जागरूक करने का जिम्मा मुख्य तौर पर कृषि विभाग और संबंधित बीमा कंपनी का है। कृषि विभाग का दावा है कि मेले, गोष्ठी और रैली के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाता है। विकसित संकल्प यात्रा में भी योजना के लाभ की जानकारी दी जा रही है। हालांकि इसका असर नजर नहीं आ रहा। कुछ जागरूक किसान ही नुकसान के डर से फसल का बीमा कराते हैं। इसके अलावा सर्वे के दौरान राजस्व कर्मचारियों की मनमानी के कारण भी किसान को फायदा नहीं मिल पाता। बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान होने पर किसान बीमा कराने में रुचि नहीं लेते।

एक-दो प्रतिशत ही कराते बीमा

जिले में करीब पांच लाख किसान कृषि विभाग में पंजीकृत हैं। हालत यह हैं कि एक या दो प्रतिशत किसान ही फसल बीमा कराते हैं। बाकी अधिकतर किसानों को बीमा संबंधित जानकारी ही नहीं होती है। बरसात में आई बाढ़ में जलालाबाद और कलान तहसील के किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई। अगर उनकी फसल का बीमा होता तो उन्हें इसका लाभ मिल जाता।

इस तरह कम हो रहे आवेदन

-वर्ष 2020 में खरीफ की फसल का 9374 किसानों ने फसल बीमा कराया। इसमें 61 किसानों को लाभ मिला। वर्ष 2020-2021 में रबी सीजन में 5853 किसानों ने बीमा कराया। 149 किसानों को लाभ मिला। खरीफ वर्ष 2021 में 5321 किसानों ने बीमा कराया जिसमें से 755 किसानों को लाभ मिला। रबी वर्ष 2121-22 में 4308 किसानों ने फसल बीमा कराया, जिसमें से 291 को लाभ मिला। खरीफ वर्ष 2022 में 5313 किसानों ने बीमा कराया, जिसमें से 929 किसानों को लाभ मिला। रबी वर्ष 2022-23 में 5062 किसानों ने फसल बीमा कराया, जिसमें 643 किसानों को लाभ मिला। खरीफ वर्ष 2023 में 4380 किसानों ने बीमा कराया, जिसमें 128 किसानों को बीमा का लाभ मिलेगा, रबी वर्ष 2023-24 में 1783 किसानों ने अभी तक बीमा कराया है, 31 दिसंबर बीमा कराने की आखिरी तिथि है। इस बार सबसे कम आवेदन आए हैंं।

फसल बीमा के बारे में जानकारी नहीं है। सरकार बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि आदि आपदाओं में फसलों के नुकसान पर किसानों को मुआवजा देती थी। इस बार बाढ़ में नष्ट हुई फसल का मुआवजा नहीं मिल पाया।

– लोकनाथ वर्मा, नई बस्ती मोहम्मदपुर

पिछले वर्ष खरीफ की सीजन में दो एकड़ धान की फसल बाढ़ में डूबने की वजह से बर्बाद हो गई थी। फसल का बीमा भी कराया था, जिसका लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है।

– महिपाल सिंह, जगदीशपुर।

पिछले वर्ष बाढ़ में एक एकड़ धान की फसल डूबकर नष्ट हो गई। फसल का बीमा भी था। बैंक के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अभी तक बीमा की रकम नहीं मिल पाई है।

सर्वेश, जैतीपुर

प्रधानमंत्री फसल बीमा के लिए किसानों को मेले, रैलियों के माध्यम से जागरूक किया जाता है। इसके बाद भी किसान बहुत कम संख्या में बीमा का लाभ ले रहे हैं। इसके लिए गांव-गांव अभियान चलाकर जागरूक किया जाएगा।

धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं

महिपाल सिंह, जगदीशपुर। स्रोत: स्वयं


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