Shahjahanpur News: खुटार सीएचसी पर नहीं मिले डॉक्टर, मरीज ने तोड़ा दम

खुटार सीएचसी पर डॉक्टर नहीं होने पर थक हार कर जमीन पर बैठे रोगी। संवाद
खुटार। सीएचसी पर डॉक्टर के नहीं मिलने पर अत्यंत गंभीर बीमार रोगी की कुछ ही देर में मौत हो गई। फार्मासिस्ट के अनुसार बीमार की हालत काफी खराब थी।
गांव सरेली के रामस्वरूप (60) को तीन दिन पहले सीएचसी लाया गया था। उनको सांस लेने में दिक्कत थी। उपचार के बाद उनको जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन परिजन उनको घर ले गए। सोमवार को फिर दिक्कत होने पर सुबह साढ़े नौ बजे रामस्वरूप को सीएचसी लाया गया। सीएचसी पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। फार्मासिस्ट संजीव कुमार ने ऑक्सीजन लगाई, लेकिन कुछ ही देर में रामस्वरूप की मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव घर ले गए।
इस समय अस्पतालों में बुखार के रोगियों की भरमार है। निजी और सरकारी अस्पतालों में दवा लेने के लिए बड़ी संख्या में रोगी पहुंच रहे हैं, लेकिन सीएचसी पर डॉक्टर और स्टाफ लापरवाही बरत रहा है। सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक ओपीडी का समय होने के बाद भी सोमवार को सीएचसी पर 10:45 तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा था। सीएचसी पर अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार, डॉ. तरुण कुमार और डॉ. अंकित वर्मा की तैनाती है।
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डॉक्टरों के कमरों से लौटे मरीज
सुबह साढ़े दस बजे का समय हो चुका था। तमाम रोगी पर्चे बनवाने के लिए लाइन में लगे थे, लेकिन कोई डॉक्टर सीएचसी पर मौजूद नहीं था। रोगी और उनके तीमारदार पर्चे बनवाने के बाद डॉक्टरों के कमरों तक जाकर लौट रहे थे और डॉक्टरों के देर से आने पर नाराजगी जता रहे थे।
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थक कर जमीन पर बैठ गए रोगी
10:45 तक कोई भी डॉक्टर सीएचसी पर अपने कमरे में नहीं पहुंचा था। काफी देर से डॉक्टर का इंतजार कर रहे रोगी जमीन पर ही बैठकर डॉक्टर का इंतजार करने लगे। 10:50 पर डॉ. अंकित वर्मा पहुंचे और रोगियों को देखना शुरू किया।
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अन्य डॉक्टरों के समय से नहीं पहुंचने पर रोगी परेशान घूमते रहे। कई रोगी तो डॉक्टरों के कमरे में इस इंतजार में जाकर खड़े हो गए कि डॉक्टर के आने पर पहले दवा लिख जाए, जिससे वे घर जा सकें। रोगी सिस्टम को कोसते दिखे। कहा, अधिकारी भी ध्यान नहीं देते हैं।
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हम लोग रात में भी ड्यूटी करते हैं इसीलिए सुबह देर हो जाती है। सोमवार सुबह किसी मरीज की मौत के बारे में जानकारी नहीं है। फार्मासिस्ट से पता किया जाएगा।
-डॉ. संजीव कुमार, अधीक्षक, सीएचसी खुटार

खुटार सीएचसी पर डॉक्टर नहीं होने पर थक हार कर जमीन पर बैठे रोगी। संवाद