Shahjahanpur News: शासन में फंसा हैदलपुर का पुल, अब चार महीने भटकेगी जनता

फोटो 44, कोलाघाट पैंटून पुल को हटाते मजदूर।संवाद
जलालाबाद। बरसात शुरू होने के साथ ही लोक निर्माण विभाग ने रामगंगा नदी पर बने हैदलपुर के पैंटून पुल को हटाना शुरू कर दिया है। पैंटून पुल के हटने से कई गांवों के लोगों को मुख्यालय आने में करीब 90 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। कोलाघाट के नए पुल को लेकर कवायद शुरू की गई है, लेकिन हैदलपुर के पक्के पुल का प्रस्ताव शासन में अटका हुआ है।
खंडहर इलाके के इस पुल की अहमियत क्षेत्र के लोगों के लिए कोलाघाट पुल जैसी है। इसी के चलते यहां पक्के पुल निर्माण की मांग जनता द्वारा लंबे समय से करते आ रही है। इसको लेकर क्षेत्र के गांव फरीदापुर स्थित हनुमान मढ़ी के बाबा शांतिदास ने तीन बार अनशन भी किया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। वर्ष 2020 में बाबा का अनशन तुड़वाने पहुंचे तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी ने पक्के पुल की स्वीकृति न होने तक आवागमन की सुविधा के लिए यहां पैंटून पुल बनवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सेतु निगम ने पक्के पुल का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया था। तब से प्रस्ताव पर शासन से मुहर का इंतजार जनता कर रही है।
जलालाबाद होकर परौर और कलान जाना पड़ेगा
खंडहर क्षेत्र के हैदलपुर घाट की दूरी जलालाबाद से करीब 18 किलोमीटर है। इस घाट पर पुल होने से परौर चार किलोमीटर और कलान की दूरी बमुश्किल 17 किलोमीटर की होगी। पुल के अभाव में इस क्षेत्र के लोगों को जलालाबाद होकर परौर व कलान जाना पड़ेगा। राजेपुर होकर जाने के कारण चौपहिया वाहनों के लिए यह दूरी 90 किलोमीटर की हो जाएगी। इससे खर्च बढ़ने के साथ समय भी खासा लगेगा।
ये गांव होंगे प्रभावित
इस क्षेत्र के गांव हैदलपुर, फरीदापुर, मंगटोरा, कुंडरा पहाड़पुर, चचुआपुर, खजुहाहार टापर, भुलभुलागंज, शाहपुर, हथिनापुर, पेहना, मंझोला, समैचीपुर के अलावा उस पार के गांव परौर, कदराबाद, दहिलिया, मंझा, हरद्वारा, कौमी, गहबरा व सोहड सहित करीब दो दर्जन गांवों के हजारों लोग प्रभावित होंगे।
अनशन का भी नहीं हुआ फायदा, अबकी बार होगी आरपार की लड़ाई
हमने क्षेत्रीय जनता के सहयोग से तीन बार अनशन किया। हर बार उन्हें पक्के पुल बनवाने का आश्वासन दिया गया। इस दिशा में कोई काम आगे न बढ़ना लोगों के साथ धोखा है। समय आने पर जनता को इसका जवाब देना चाहिए।
बाबा शांतिदास
पुल निर्माण संबंधी मांग जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार रखी गई। कोई सुनवाई नहीं हुई। पुल न होने से जनता को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस बार लोग लोकसभा के चुनाव का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं।
अजित वर्मा, कादराबाद
पुल न होने से दोनों तरफ के लोगों को दिक्कतें होती हैं। तमाम स्थानों पर पुल बनाए जा रहे हैं लेकिन सालों से इस पुल की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मांग को लेकर अबकी बार आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
नरेंद्र सिंह, फरीदापुर
कृषि कार्य के अलावा दोनों तरफ के लोगों की रिश्तेदारियां इधर-उधर होने से हर समय आना-जाना रहता है। नाव से नदी पार करने में हर समय खतरा बना रहता है। शासन और प्रशासन को लोगों की इस दिक्कत को समझना चाहिए।
-मंजू सिंह, समाज सेविका, फरीदापुर
कोलाघाट के पैंटून पुल से भी आवागमन बंद
सोमवार की सुबह कोलाघाट पुल के पटले और गाटर खोलने का काम शुरू हो जाने से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। पैदल या बाइक सवार पक्के पुल से निकल सकते हैं। जानकारी के अभाव में वहां पहुंचने वाले चौपहिया वाहन वापस होते रहे। पुल के अभाव में चौपहिया वाहनों को करीब पचास किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जनपद फर्रुखाबाद के राजेपुर होकर आना-जाना पड़ेगा। 147 करोड़ की लागत से कोलाघाट पर नए पक्के पुल का निर्माण प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि मानसून के बाद प्रस्ताव पर तेजी से काम होगा। तब तक लोगों को दिक्कत उठानी पड़ेगी।
करीब तीन साल पहले हैदलपुर पर पक्के पुल का प्रस्ताव शासन में भेजा गया था। प्रस्ताव पास होने के बाद पुल को लेकर कवायद आगे बढ़ाई जाएगी। – वीके मौर्य, डीपीएम, सेतु निगम
मानसून में पैंटून पुल हटा ही दिए जाते हैं, अन्यथा तेज बहाव में बह जाएंगे। कोलाघाट और हैदलपुर के पैंटून पुल हटाए जा रहे हैं। लोग यहां से निकलने का प्रयास न करें। – रथिन सिन्हा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी

फोटो 44, कोलाघाट पैंटून पुल को हटाते मजदूर।संवाद

फोटो 44, कोलाघाट पैंटून पुल को हटाते मजदूर।संवाद

फोटो 44, कोलाघाट पैंटून पुल को हटाते मजदूर।संवाद

फोटो 44, कोलाघाट पैंटून पुल को हटाते मजदूर।संवाद