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Shahjahanpur News: बिना किट नसबंदी के लिए इंजेक्शन लगाने की जांच शुरू, एसीएमओ और परामर्शदाता को नोटिस

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Action will be taken against the candidate for violating the code of conduct

रविंद्रा देवी। स्रोत-स्वयं

शाहजहांपुर। नसबंदी के लिए महिलाओं को बुलाकर उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के मामले में लापरवाही स्वीकार करने के बजाय विभाग के जिम्मेदार एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके पर ही नहीं थे।

परिवार नियोजन के परामर्शदाता ने आशा कार्यकर्ताओं पर ही महिलाओं को भड़काने का आरोप लगा दिया। दूसरी ओर एक नर्स पर किट में रिंग लोडर न रखने की बात कहकर पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह भी है कि पूरी किट चेक किए बिना महिलाओं को बेहोशी के इंजेक्शन क्यों लगा दिए गए। रिंग लोडर के इंतजाम में घंटों की देरी क्यों की गई। यही नहीं, घूरे घटनाक्रम में बदइंतजामी और लापरवाहियां भी उजागर हो रहीं हैं।

फिलहाल सीएमओ ने एसीएमओ डॉ.गोविंद स्वर्णकार, परिवार नियोजन के परामर्शदाता अनिल गंगवार, मदनापुर की स्टाफ नर्स प्रीति को नोटिस दिया है। मामले की जांच जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.पीपी श्रीवास्तव को सौंपी गई है।

मंगलवार को निगोही सीएचसी में आयोजित नसबंदी कैंप में 53 महिलाएं पूर्वाह्न 11 बजे पहुंच गईं थीं। जांच में पांच महिलाओं के गर्भवती होने की जानकारी पर शेष 48 को दो बजे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया। दोपहर साढ़े तीन बजे बरेली से आए डॉ. अविनाश आनंद ने नसबंदी की तैयारी शुरू की तो किट में रिंग लोडर नहीं मिला। इस पर उन्होंने ऑपरेशन से इन्कार कर दिया। नशे के इंजेक्शन के चलते कई महिलाएं उल्टी करने लगीं। कुछ गैलरी में बैठकर इंतजार करती रहीं। इंतजार करते हुए सूरज ढल गया। किसी तरह इंतजाम करके शाम को पुवायां से रिंग लोडर मंगाया गया। सारी कवायद में शाम के सात बज जाने पर आशा वर्करों और महिलाओं ने विरोध करना शुरू कर दिया। महिलाओं के तैयार न होने पर रात में एंबुलेंस से सभी को घर भिजवाया गया। बुधवार को मामला संज्ञान में आने के बाद सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने परिवार नियोजन के स्टाफ को अपने कार्यालय में तलब करते हुए फटकार लगाई। उन्होंने एसीएमओ आरसीएच डाॅ. गोविंद स्वर्णकार व परिवार नियोजन कार्यक्रम के परामर्शदाता अनिल गंगवार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। सीएमओ ने बताया कि टूल किट में पर्याप्त सामान नहीं रखने वालीं मदनापुर की स्टाफ नर्स प्रीति से जवाब तलब किया गया है।

पहले लापरवाही फिर आशा वर्करों पर भड़काने का आरोप

कैंप को सकुशल निपटाने की जिम्मेदारी एसीएमओ आरसीएच डॉ. गोविंद स्वर्णकार, परामर्शदाता परिवार नियोजन अनिल कुमार पर मुख्य रूप से थी। दोनों ही अधिकारी मौके पर नहीं थे। अधिकारियों के मुताबिक वे लोग जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में थे। हंगामा होने पर शाम को दोनों अधिकारी निगोही सीएचसी पहुंचे थे। अनिल कुमार के मुताबिक आशा वर्करों ने महिलाओं को भड़का दिया था जिसकी वजह से वे नसबंदी के लिए तैयार नहीं हुईं। शुरुआती जांच में मदनापुर की स्टाफ नर्स प्रीति पर रिंग लोडर किट में न रखने की बात सामने आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि पहले किट की जांच निगोही सीएचसी में क्यों नहीं की गई? जब सर्जन ने किट आधी-अधूरी देखी तो सर्जरी से इन्कार कर दिया। इसके कई घंटे बाद रिंग लोडर उपलब्ध कराया जा सका। तब तक सुबह से इंतजार कर रहीं महिलाओं का धैर्य चुक गया।

शनिवार को फिर से कैंप, नसबंदी के लिए मनाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

-अधिकारियाें की नाराजगी के बाद स्वास्थ्य विभाग शनिवार को फिर से कैंप का आयोजन करेगा। अब महिलाओं को फिर से सीएचसी तक लाना उनके लिए चुनौती है। ऐसे में परिवार नियोजन के अधिकारियाें ने महिलाओं से संपर्क साधकर उनका मान-मनौव्वल कर दोबारा से कैंप में बुलाने की कवायद को शुरू किया है।

शिविर में आईं काफी दिक्कतें

– पति मुकेश मजदूरी करते हैं। सात बच्चे होने के चलते अब परिवार और बड़ा नहीं करना चाहते हैं। नसबंदी कराने दिन में 11 बजे पहुंच गए थे। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण शाम सात बजे तक ऑपरेशन शुरू नहीं हुआ तो वापस आना पड़ा। – सोनी, गिरगिचा-निगोही

दिन भर परेशान किया गया

पति मजदूरी करते हैं। दो बच्चे परिवार में हैं। खेती भी पास नहीं है। ऐसे में तीसरा बच्चा नहीं चाहते हैं। आशा वर्कर से नसबंदी कैंप के बारे में जानकारी मिली थी। दिनभर परेशान किया गया। चमेली, पराझरसा-निगोही

शिविर में थी काफी अव्यवस्था

नसबंदी शिविर में काफी अव्यवस्था थी। पूरे दिन आशा वर्करों को भूखा-प्यासा रखा गया। शाम को नसबंदी कराने से इन्कार कर दिया। जनरेटर तक नहीं चला। सोलर लाइट की व्यवस्था थी। – रविंद्रा देवी, ब्लॉक अध्यक्ष, आशा यूनियन।

-नसबंदी कैंप के मामले में लापरवाही की जांच शुरू कर दी गई है। नसबंदी के उपकरणों की कमी नहीं है। स्टाफ नर्स उपकरण को रखना भूल गई थी। अगले कैंप के लिए डॉक्टर के साथ एक अन्य स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहेगी। फिलहाल स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। – डॉ.आरके गौतम, सीएमओ

मंगलवार को मैं जिलास्तरीय बैठक में मौजूद था। सूचना मिलने पर पुवायां से रिंग लोडर की व्यवस्था करके निगोही सीएचसी भिजवाया था। उपकरण पूरे रखने की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स की थी। – डॉ. गोविंद स्वर्णकार, एसीएमओ आरसीएच

एमओआईसी होने के नाते मेरी जिम्मेदारी केवल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध करानी थी। शिविर में व्यवस्थाओं को सुचारु रखने का जिम्मा मैनेजर का था। – नितिन चौधरी, एमओआईसी निगोही सीएचसी

बरेली से सर्जन ही दोपहर तीन बजे पहुंचे थे। रिंग लोडर की व्यवस्था भी कर ली गई थी। दो नसबंदी हुईं थीं। बाद में आशा वर्करों ने महिलाओं को भड़का दिया जिससे महिलाएं वहां से चली गईं।

– अनिल कुमार, परामर्शदाता, परिवार नियोजन

रविंद्रा देवी। स्रोत-स्वयं

रविंद्रा देवी। स्रोत-स्वयं


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