Shahjahanpur News: 15 जून से हटने लगेंगे कोला और हैदलपुर के पैंटून पुल
जलालाबाद। मानसून आने से पहले लोक निर्माण विभाग क्षेत्र के कोलाघाट और हैदलपुर घाट पर बने पैंटून पुलों को हटाने की तैयारी में जुट गया है। इस वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में कलान तहसील का सीधा और आसान जुड़ाव जिला मुख्यालय से टूट जाएगा। अब चार पहिया वाहन चालकों के लिए फर्रुखाबाद के राजेपुर होकर आना-जाना होगा। इसमें समय की बर्बादी और आर्थिक नुकसान उठाना होगा। एक ओर से 50 किलोमीटर से ज्यादा चक्कर लगाना पड़ेगा। समय और धन बचाना है तो नाव से आवागमन करना होगा।
कोलाघाट का पक्का पुल 29 नवंबर 2021 को टूटने के बाद आवागमन में होने वाली परेशानी को देखते हुए लोक निर्माण विभाग दो सालों से कोलाघाट में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पैंटून पुल का निर्माण कराता है। खंडहर इलाके में हैदलपुर घाट पर पैंटून पुल बनने के बाद परौर की दूरी मात्र दस किलोमीटर रह जाती है जबकि पुल हटने के बाद राजेपुर होकर यही दूरी सौ किलोमीटर से ज्यादा होती है।
पुल न होने पर कोलाघाट होकर कलान तक करीब 30 किलोमीटर का रास्ता 85 किलोमीटर की दूरी में तब्दील हो जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लोगों को हो जाती है जो कलान क्षेत्र के उन गांवों में रहते हैं जो बदायूं सीमा पर बसे हैं। इस क्षेत्र के लोगों का निजी वाहन के बगैर मुकदमे की पैरवी या अन्य किसी कार्य से जिला मुख्यालय जाकर उसी दिन लौट पाना संभव नहीं रह जाता। लोक निर्माण विभाग पिछले साल की तरह 15 जून से दोनों पुलों को खोलने का काम शुरू कर देगा।
अब डग्गामार और नाव का जोखिम भरा सफर होगा विकल्प
बड़ी तादाद में लोग कलान और मिर्जापुर क्षेत्र के अलावा फर्रुखाबाद और बदायूं जनपद तक आते-जाते है जिनमे बड़ी संख्या में वह लोग होते हैं जिनके पास अपने वाहन नहीं हैं। पैंटून पुल टूटने के बाद ऐसे लोगों को जलालाबाद से रामगंगा नदी तक और नदी के उस पार से गंतव्य तक पहुंचने के लिए डग्गामार वाहनों का ही सहारा रह जाता है। नदी पार करने के लिए नाव का विकल्प होता है। बरसात के दिनों में नदी के उफनाने पर नाव का सफर काफी जोखिम भरा होता है। पिछले साल भी कई बार नाव पलटने की घटनाएं हुईं थीं लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई थी। डग्गामार वाहन हों या नाव दोनों जगहों पर यात्रियों से मनमाना किराया भी वसूला जाता है। इस दौरान उन लोगों को और भी परेशानी होती है जो व्यापार या नौकरी के चलते रोजाना आते-जाते हैं।
दोपहिया वाहनों को इस बार रहेगी राहत
कोलाघाट पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरमम्त के कुछ महीने बाद जनता की मांग पर सेतु निगम ने कोला पुल से बाइक आने-जाने की अनुमति दे दी थी। इससे पैंटून पुल टूटने के बाद भी पक्के पुल से बाइक निकलते रहने से राहगीरों को काफी राहत मिलेगी। पिछले साल नाव पर बाइक चढ़ाने-उतारने के लिए राहगीर नाव संचालक को मोटी रकम चुकाते थे। साथ ही समय भी ज्यादा खर्च होता था। अब केवल पैदल यात्रियों को ही इस दिक्कत से जूझना होगा।
जांच रिपोर्ट के अभाव में अटका अवागमन
कोलाघाट पर 2008-09 में 45 करोड़ रुपये की लागत से 1.8 किमी लंबा पुल बनाया गया था। सेतु निगम ने करीब छह माह पहले सात करोड़ रुपये की लागत से पुल के टूटे हिस्से की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम पूरा कर लिया था। एक अक्तूबर 2022 से पुल पर पैदल और दोपहिया वाहनों का आवागमन भी शुरू कर दिया गया। लोक निर्माण विभाग ने पुल की केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) से गुणवत्ता जांच कराई। संस्थान के विशेषज्ञों ने अभी तक दो जांच रिपोर्ट दी हैं, इनमें पुल के ऊपरी हिस्से में कई खामियां बताते हुए उन्हें दूर करने की सिफारिश की है। सीआरआरआई ने पुल के वेल फाउंडेशन की अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं भेजी है, जबकि दूसरी जांच में पुल के 60 में से 15 पिलर क्रिटिकल पोजीशन में बताए हैं। अधिकारियों के अनुसार सीआरआरआई की अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने पर भी पुल पर सामान्य यातायात बंद रहेगा।