Shahjahanpur News: आदमी से आदमी डरने लगा है…

शाहजहांपुर में काव्य संध्या में काव्यपाठ करते कवि। स्रोत-स्वयं
शाहजहांपुर। प्रवाह साहित्यिक संस्थान की मासिक काव्य संध्या का आयोजन श्री बिहारी लाल सरस्वती विद्या मंदिर में किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से खूब धूम मचाई।
काव्यपाठ में राज ‘व्योमकेश’ ने वाणी वंदना के उपरांत काव्यपाठ करते हुए सुनाया –
राजमुकुटों ने चाही मनमानी करनी तो,न्याय में अनीतियों से क्रुद्ध रही कविता।
चंद्र मोहन पाठक ने अपने भावों की अभिव्यक्ति कुछ इस प्रकार की –
मैं तो गीत लिखा करता हूं जन-गण-मन के क्रंदन पर,मेरी कलम चला करती है वीरों के अभिनंदन पर।
उमेश चंद्र सिंह ने अपनी बात कुछ यूं कही –
आदमी को आदमी हड़ने लगा है, आदमी से आदमी डरने लगा है।
डाॅ. राजीव सिंह भारत ने मुक्तकों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर चोट की –
बचपन की जब लाज हवाएं लूट रहीं, यौवन से कब तलक दुपट्टा संभलेगा।
आक्रोश के कवि सुशील दीक्षित ‘विचित्र’, कमल मानव, ज्ञानेंद्र मोहन ‘ज्ञान’ ने भी काव्यपाठ किया। आभार चंद्र मोहन पाठक ने व्यक्त किया।