शाहजहाँपुर

Shahjahanpur News: मरीजों के बोझ से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमराई

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The medical college system collapsed due to the burden of patients

शाहजहांपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीज।

शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों के बोझ के चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। जिले के अलावा सीमावर्ती जनपदों के मरीजों की भरमार के कारण बेड तक नहीं मिल पा रहे हैं। अस्पताल में स्टाफ की कमी के चलते जूनियर डॉक्टरों के सहारे मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज करीब 1500 से अधिक मरीज अपना पर्चा बनवाते हैं। इसी तरह पुराने पर्चे के जरिये बड़ी संख्या में मरीज दवा लेते हैं। ट्रामा सेंटर में रोजाना 24 घंटे में 150 मरीजों का भर्ती होना आम बात है। हर दिन करीब चार से पांच हजार मरीजों और तीमारदारों के अस्पताल में आने के चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा रही है।

डॉक्टरों के मुताबिक, शाहजहांपुर के अलावा पड़ोसी जिले लखीमपुर खीरी, हरदोई, पीलीभीत आदि जिलों के मरीज भी यहां आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने के चलते अस्पताल में बेड को लेकर मारा-मारी मची रहती है। 330 बेड के अस्पताल में 500 बेड होने के बाद भी मरीजों को भटकना पड़ रहा है। हालत यह है कि ट्रामा सेंटर में आए दिन स्ट्रेचर या एक बेड पर दो मरीज लिटाकर उपचार किया जाता है।

पर्याप्त डॉक्टर तक नहीं, जूनियर के सहारे चल रहा अस्पताल

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्टाफ न होने की वजह से मरीजों की संख्या को देखते हुए बेड बढ़ाना मुमकिन नहीं। इसके अतिरिक्त अस्पताल में बेड डालने के लिए जगह भी नहीं बची है। स्टाफ पर नजर डालें तो अस्पताल में 49 जूनियर रेंजीडेंट (जेआर), 22 एसआर (पीजी) के डॉक्टर हैं। इसके सहारे अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था चल रही है।

प्रमुख विभागों में डॉक्टरों की कमी

एनेस्थीजिया विभाग में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर का पद खाली पड़ा है। महिला रोग विभाग में प्रोफेसर का पद रिक्त है, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर एक की तैनाती है। सर्जरी विभाग में प्रोफेसर, हड्डी रोग विभाग में प्रोफेसर का पद खाली है, जबकि आर्थो में दो असिस्टेंट के जरिये ही काम लिया जा रहा। बाल रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर और जेआर के जरिये उपचार किया जा रहा। यहां पर असिस्टेंट प्रोफेसर ने कुछ दिन पहले ही त्यागपत्र दे दिया था।

2016 से बन रहा है सौ बेड का अस्पताल

राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण 2016 से कराया जा रहा है। विभागीय लापरवाही के कारण समय निकलने के बाद भी अस्पताल पूरा नहीं हो सका है। हालांकि, इस वर्ष शासन के संज्ञान लेने के बाद कार्य ने तेजी पकड़ी है। ग्राउंड फ्लोर समेत छह मंजिल 100 बेड के अस्पताल के दो फ्लोर का काम पूर्ण हो गया। तीसरे फ्लोर पर काम चल रहा है।

जिले के सटे जनपदों के मरीज भी अस्पताल में आते हैं। इसके चलते मरीजों की संख्या अधिक रहती है। कोशिश रहती है कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा को मुहैया करा सकें। डॉक्टरों के खाली पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सभी दवाइयों की उपलब्धता है। – डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज


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