Shahjahanpur News: कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले जगवीर तक नहीं पहुंचे पुलिस के हाथ
शाहजहांपुर। मीरानपुर कटरा में असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक गुप्ता हत्याकांड में नामजद सगीर और जैतीपुर में सड़क उखाड़ने के चर्चित मामले के मुख्य आरोपी जगवीर तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे हैं। 23 दिन बीतने के बावजूद पुलिस की टीमें जगवीर तक नहीं पहुंच सकीं। जबकि वह अदालत में जमानत अर्जी डालकर चला गया। हालांकि अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। माना जा रहा है कि अब वह हाईकोर्ट की शरण लेगा।
19 सितंबर को कटरा के घेर बाजार मोहल्ले में आलोक गुप्ता की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने घटना की शाम को आरोपी शाहबाज का एनकाउंटर कर दिया था। जबकि दूसरे आरोपी शहरोज को जेल भेजा गया था। हत्याकांड में सगीर खां को आरोपियों का संरक्षण बताते हुए नामजद किया गया था। पुलिस सगीर की भूमिका को लेकर अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी पुलिस के अफसर जांच चलने की बात कहकर टाल रहे हैं। पुलिस न तो हत्याकांड से सगीर खां का संबंध बता पा रही है और न ही इन्कार कर रही है। पुलिस के आला अधिकारी सगीर खां की गिरफ्तारी के दावे कर रहे हैं लेकिन इस दिशा में कोई खास प्रयास होते नजर नहीं आ रहे। वहीं परिजन खुद को जान का खतरा बता रहे हैं।
इसी तरह दो अक्तूबर को जैतीपुर में सड़क उखाड़ने के चर्चित मामले के आरोपी जगवीर भी पुलिस की पकड़ से दूर है। घटना के बाद पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने भी सुरक्षा को लेकर खतरा जताया था। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी मानते हैं कमीशन न देने पर सड़क उखाड़ने जैसी घटना पूर्व में कभी नहीं हुई। मामला जब मीडिया के जरिये चर्चा में आया तो मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया था। पुलिस गिरफ्तारी के प्रयास का दावा करती रही, जबकि जगवीर ने कचहरी में अग्रिम जमानत याचिका भी डलवा दी थी। अदालत ने उसकी याचिका पर्याप्त आधार न होने पर खारिज कर दी थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसओजी समेत तीन टीमों को लगाया गया है। एसओजी ने कई दिन तक लखनऊ में डेरा डाले रखा। तब भी पुलिस उसका सुराग नहीं लगा पाई है। पुलिस के सुस्त रवैये के चलते दोनों मामले दबने लगे हैं।
गंभीर नहीं नजर आ रहे गिरफ्तारी के प्रयास : आमतौर पर घटना के तत्काल बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने में माहिर पुलिस जगवीर की गिरफ्तारी को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही। मुखबिर तंत्र भी अब तक फेल साबित हुआ है। माना जा रहा है कि जगवीर को सत्ता पक्ष का संरक्षण मिला हुआ है। फरार आरोपियों पर इनाम रखने की कवायद यहां अमल में नहीं लाई जा रही। पुलिस के अधिकारी गिरफ्तारी के प्रयास करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं सगीर खां के मामले में पुलिस दबी जुबान यह स्वीकारती है कि उसका हत्याकांड से सीधा कोई लेना-देना नहीं था। हत्यारोपी शाहबाज और शहरोज से सगीर के रिश्तों को लेकर भी कुछ साफ बताने को पुलिस तैयार नहीं है।
एसपी देहात संजीव वाजपेयी ने बताया कि जगवीर की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जा रहा है। उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। आलोक हत्याकांड में सगीर खां की भूमिका की जांच चल रही है।