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Shahjahanpur News: लखनऊ में वाटर स्पोर्ट्स की तैयारी, पुवायां में धार तक खेती

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Preparation for water sports in Lucknow, farming till the edge in Puwayan

पुवायां में नाले में तब्दील गाेमती नदी। संवाद

पुवायां । लखनऊ में गोमती नदी में वाटर स्पोर्ट्स आयोजित करने की तैयारी चल रही है, लेकिन जिले में आदिगंगा के नाम से मशहूर गोमती बदहाल है। यहां नदी तट तक अवैध कब्जे कर खेती की जा रही है। हालात यह हैं कि नदी अब नाले की तरह दिखने लगी है। हालांकि, प्रशासन अब अभियान चलाकर कार्रवाई की बात कह रहा है।

पर्यटन विभाग के उप निदेशक कल्याण सिंह ने निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है कि लखनऊ में गोमती नदी में वाटर स्पोर्ट्स शुरू किया जा सकता है। इसके तहत कैनोइंग, कैटामरैन नौकायन, पैरा सेलिंग, स्कूबा डाइविंग, विंड सर्फिंग जैसे खेल शुरू किए जाने की योजना है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद गोमती नदी पर्यटन का हब बन जाएगी। वहीं, जिले के बंडा, पुवायां, खुटार क्षेत्र में गोमती की हालत बेहद खराब है। यहां अवैध कब्जों के चलते गोमती भी भैंसी नदी की तरह सूखने की कगार पर पहुंच गई है। नदी के तटों तक अवैध कब्जे कर खेती की जा रही है और अवैध रूप से शिकार के चलते जलीय जंतु विलुप्त हो गए हैं।

गोमती को लेकर यह है किवदंती

किवदंती है कि इंद्र ने एक बार गौतम ऋषि के श्राप से मुक्ति के लिए गोमती के तटों पर 1001 शिवलिंगों की स्थापना कर तपस्या की थी। उस समय इंद्र को तो श्राप से मुक्ति मिल गई, लेकिन अब गोमती जलीय जीवों की हत्या, तटों पर की जा रही खेती से सिमटती जा रही है।

जिले में गोमती का 103 किमी का सफर

गोमती की यात्रा पीलीभीत जनपद के माधौटांडा कस्बे के पास (गोमत ताल) फुलहर झील से शुरू होती है। शाहजहांपुर में गोमती नदी बंडा के गांव मानपुर के पास से प्रवेश करती है। इसके बाद नदी बंजारघाट, सुनासिरनाथ, मझरिया मोटे बाबा घाट, गुटैया घाट, पन्नघाट से गुजरती है। शाहजहांपुर में मानपुर, इंदलपुर, ददिउरी, बिलंदपुर गौंटिया, गदाईसांडा, महमूदपुर सैंजनियां, नत्थापुर, औरंगाबाद सहित कई गांव पड़ते हैं। जिले में नदी कुल 103 किमी लंबी है।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल, फिर भी दशा बदहाल

गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट की ओर से नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। नवंबर 2016 में इस योजना में गंगा की सहायक नदियां भी शामिल की गई थीं। परियोजना में उत्तर प्रदेश से केवल गोमती, गंडक और शारदा को ही शामिल किया गया था। गोमती, गंडक और शारदा का भी गंगा नदी की तरह विकास किया जाना था। गोमती से अवैध कब्जे हटाने, नदी में अपशिष्ट जाने से रोकने, पौधरोपण करने सहित तमाम काम होने थे, लेकिन अब तक गोमती के विकास के लिए कोई काम नहीं हो सका है।

वर्ष 2018 में शुरू हुआ अभियान भी रुका

जन सहयोग से गोमती नदी की धारा को अविरल बनाने के लिए अप्रैल 2018 में तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी ने कहा था कि जन सहयोग से गोमती की सफाई होगी। सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता उस्मान अली को नोडल अधिकारी भी बनाया गया था। डीएम के तबादले के बाद से आज तक गोमती की धार को अविरल करने के लिए कोई काम ही नहीं किया गया।

गोमती नदी के किनारे के खेत स्वामी नदी के स्रोत बंद कर रहे हैं। इससे जलधार खत्म होती जा रही है। गोमती नदी के किनारे नाप होकर अवैध कब्जे हटवाए जाएं और उसी जगह पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण कराया जाए।

आशुतोष मिश्र, निवासी जुझारपुर, पुवायां

इस समय अवैध कब्जे हटवाने का अभियान चल रहा है। जल्द ही टीम गठित की जाएगी जो सर्वे करेगी और गोमती तट से अवैध कब्जे हटवाएगी।

संजय कुमार पांडे, एसडीएम पुवायां


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