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Shahjahanpur News: विदेश में नौकरी का ऑफर ठुकराया… फल की खेती को बनाया कॅरियर

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संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर

Updated Sat, 23 Dec 2023 12:40 AM IST

Rejected job offer abroad...made fruit farming a career

सेब और अमरूद के बाग में गुरूसेवक सिंह। संवाद

खुटार (शाहजहांपुर)। एक तरफ जहां युवा उच्च शिक्षा के बाद बड़ी कंपनियों में रोजगार खोजते हैं तो दूसरी तरफ खुटार में बंडा रोड पर गांव सौंफरी निवासी गुरूसेवक सिंह ने विदेश में 27 लाख रुपये नौकरी का ऑफर ठुकराकर फलों की खेती में कॅरियर बना लिया। अब अपने ज्ञान का इस्तेमाल वह खेती में कर रहे हैं। सेब और ताइवान पिंक अमरूद की खेती के बाद अब वह चंदन उगाने की तैयारी कर रहे हैं। कुल दस एकड़ खेती से उन्हें करीब 30 लाख रुपये वार्षिक आय होती है।

गुरूसेवक ने जालंधर से एमएससी (आईटी) और नई दिल्ली से एमसीपी और सीसीएनए किया है। पढ़ाई के बाद तमाम युवाओं की तरह उनका सपना भी विदेश में जाकर नौकरी करने का था। उनको यूके की स्काईवर्क आईटी सॉल्यूशन से नौकरी का ऑफर भी मिला। वहां जाने की तैयारियां भी हो गई पर ऐन वक्त पर परिजनों ने उन्हें देश में ही कुछ बेहतर करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने विदेश जाने का ख्याल मन से निकाल दिया। नौकरी करने के स्थान पर उन्होंने खेती में नए प्रयोग कर अधिक आय अर्जित करने की सोची। पारंपरिक तरीके से की जा रही धान और गेहूं की खेती से उनको दस एकड़ में प्रति वर्ष पांच लाख रुपये की आय हो रही थी। गुरूसेवक ने अपने फार्म में सबसे पहले सेब के उन्नत किस्म के पौधे मंगवाकर लगाए। इसके बाद ताइवान पिंक अमरूद का बाग तैयार किया। इधर, हालांकि, अभी पेड़ छोटे हैं। अगले वर्ष तक सेब और अमरूद बाजार में आने की संभावना है। इसके अलावा गुरूसेवक ने फूलों और सब्जियों की खेती भी शुरू की। पहली बार उन्होंने खेत में गेंदे के पौधे लगवाए। गुरूसेवक के अनुसार गेंदे के पौधे सेब और अमरूद के पेड़ों को कीटों से भी बचाते हैं। उनका कहना है कि आगे चलकर पूरी खेती में फल, सब्जी, फूल आदि ही तैयार करेंगे।

सेब और अमरूद के बाग में गुरूसेवक सिंह। संवाद

सेब और अमरूद के बाग में गुरूसेवक सिंह। संवाद


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