Shahjahanpur News: रामगंगा में कटान से पहरुआ के श्रीरंगेश्वरनाथ मंदिर को खतरा

जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा नदी का निरीक्षण करते एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेश कुमार।सूचना विभा
मिर्जापुर। रामगंगा के जलस्तर में शनिवार शाम से कुछ कमी आई है। अब भू-कटान शुरू हो गया है। बताया जाता है जब नदी पहाड़ी से नीचे जाएगी तो गांव में कटान की गति और तेज हो जाएगी। कटान से तटवर्ती गांव पहरुआ में श्रीरंगेश्वरनाथ मंदिर को खतरा बढ़ गया है। वहीं ग्राम अतरी निजामपुर के घरों में भरा बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, इससे कटान की गति भी कम है।
ग्राम पहरुआ के अशोक कुमार सिंह ने बताया कि रामगंगा की बाढ़ से श्रीरंगेश्वरनाथ मंदिर को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने कच्ची ठोकरें बनाईं थीं। पहली ही बाढ़ में ठोकरें धंस गईं। मंदिर को खतरा अब भी बरकरार है। श्रीरंगेश्वरनाथ शिव मंदिर से उत्तर की ओर कमलेश, रतिराम, आशाराम के घरों से रामगंगा की लहरें टकरा रहीं हैं। शनिवार से नदी के घटे जलस्तर से इनके घरों में भरा पानी कम हो रहा है। तटवर्ती ग्राम अतरी निजामपुर की स्थिति भी गंभीर हैं। गांव के रास्ते में जलभराव होने के कारण अतरी गांव में पहुंचना आसान नहीं है।
ग्राम पंचायत बीघापुर सिठौली के प्रधान इजहार हसन के भाई आरिफ हसन ने बताया कि अब भी नदी पहाड़ी से ऊपर बह रही है। इससे पानी नदी से निकलकर खेतों में आ रहा है। गांव के आसपास की फसलें डूबकर नष्ट हो गईं हैं। घरों में भरा पानी भी खेतों में भर रहा है। इससे नदी घटने के बाद भी बाढ़ की स्थिति जस की तस है। रामगंगा से निकले अंधुईया नाले में बाढ़ का पानी अब भी कम नहीं होने से चौतरफा घिरे पूर्वी बीघापुर के ग्रामीण नाव से ही गांव के बाहर आ जा रहे हैं। यही स्थिति बीघापुर पश्चिमी की भी है।
कुंडरी आश्रम गांव को जाने वाली सड़क पर भरा बाढ़ का पानी भी रविवार को कुछ कम हुआ है। फिर भी नदी पहाड़ी के बहुत नीचे नहीं पहुंची है। नदी के तेज घटने से भू-कटान तेज होगा, जिससे कृषि भूमि के साथ ही गांव को खतरा बढ़ जाएगा। मिर्जापुर कस्बे की दक्षिणी आबादी में भी रविवार को जलभराव में कमी देखी जा रही है। कस्बे से मोहम्मदपुर गुलड़िया जाने वाले पक्के रोड पर राजबहादुर के घर के समीप से इस्माइलपुर गांव तक जगह-जगह बाढ़ का पानी बह रहा है। रोड के कट जाने से कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिनमें ग्रामीण गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
रामगंगा का जलस्तर
घटा, गंगा का स्थिर
प्रभारी अधिकारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष शारदा नहर खंड से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को रामगंगा का जलस्तर 160.790 था, जो कि रविवार को घटकर 160.700 गेज पर रह गया। गंगा का जलस्तर 142.20 गेज पर स्थिर है। गर्रा और खन्नौत नदी के जलस्तर में भी गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को गंगा नदी में नरौरा बैराज से 46,458 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 19,552 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
जलालाबाद तहसील क्षेत्र में रामगंगा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का नाव से निरीक्षण किया। फसलों को नुकसान हुआ है। रामगंगा के घटने से कई क्षेत्रों में कटान शुरू हो गया है। ऐसे क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
– डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी अधिकारी
एडीएम एफआर ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का नाव से लिया जायजा
जलालाबाद। क्षेत्र में बाढ़ के पानी का स्तर घटने के बाद भी तटवर्ती गांवों के लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। कई गांवों तक जाने वाले रास्ते पानी से भरे या कीचड़युक्त हैं। इससे आवागमन की दिक्कत बनी हुई है। इसके अलावा सैकड़ों एकड़ जलमग्न रहीं फसलें बर्बाद हो गईं हैं।
रविवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. सुरेश कुमार ने एसडीएम रविंद्र कुमार के साथ नाव से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र तिकोला, रूपापुर, दुलरामई आदि गांवों का जायजा लिया। क्षेत्र के ग्राम ऐलमनगर, कटरिया, मजरा आदि गांवों को जाने वाले रास्ते पर अभी भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीण सेठ पाल, भीमसेन, ब्रजेश आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी कई दिन भरा रहने से ग्रामीणों का जो फसली नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई कैसे होगी यह चिंता उन सभी को परेशान कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गांवों के आसपास गंदगी में भरा रहा पानी कम हो जाने के बाद भी दुर्गंध उठ रही है, इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। संवाद

जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा नदी का निरीक्षण करते एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेश कुमार।सूचना विभा

जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा नदी का निरीक्षण करते एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेश कुमार।सूचना विभा