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Shahjahanpur News: दो साल से कोलाघाट पुल का इंतजार… महंगाई बढ़ा रहा 100 किमी का फेर

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Waiting for Kolaghat bridge for two years... 100 km round trip is increasing inflation

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

शाहजहांपुर। कोलाघाट पुल का अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है, जबकि एक पिलर धंसने से पुल पर यातायात बंद हुए दो साल से ज्यादा हो चुके हैं। यहां 148 करोड़ की लागत से नया पुल बनना है लेकिन शासन से मंजूरी न मिलने से मामला अटका हुआ है। पुल न बनने से ट्रक-बस आदि भारी वाहनों को आने-जाने में करीब सौ किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इससे मिर्जापुर-कलान आदि इलाकों में रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर महंगाई बढ़ती जा रही है।

जलालाबाद को मिर्जापुर से जोड़ने के लिए रामगंगा-बहगुल नदी पर बने 18 सौ मीटर लंबे कोलाघाट पुल का एक पिलर 29 नवंबर 2021 को धंस गया था। पुल की मरम्मत पर 6.25 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। मरम्मत के बावजूद केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट में पुल की स्थिति चौपहिया वाहनों के आवागमन के लायक नहीं पाई गई थी। पुल से सिर्फ बाइक-साइकिल निकालने की अनुमति दी गई थी।

पिछले साल 12 अगस्त को जलालाबाद-शमसाबाद-सौरिख होते हुए बिधूना राज्य मार्ग संख्या-163 पर कोलाघाट पर निर्मित सेतु के समानांतर नए टू-लेन सेतु के निर्माण को वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य योजनांतर्गत चतुर्थ चरण के कार्यों में सम्मिलित कर लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसका अनुमोदन प्राप्त हो गया है। इस पुल के निर्माण पर 148 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अब पुल के निर्माण के लिए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक शासनादेश आने के बाद एक महीने में टेंंडर आदि प्रक्रिया को पूरा कराकर निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।

दो पैंटून पुल से चल रहा आवागमन

रामगंगा और बहगुल नदी पर इस बार दो पैंटून पुल बनवाए गए हैं। इससे लोगों को राहत मिली है। हालांकि एक पुल के निर्माण में पुरानी सामग्री इस्तेमाल होने से लोगों को संभलकर पुल पार करना होता है। पैंटून पुल बनने से हल्के चार पहिया वाहनों को तो 100 किलोमीटर का फेर काटने से मुक्ति मिल गई है, लेकिन लोड ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रक, बस आदि भारी वाहनों को पैंटून पुल से गुजरने की अनुमति नहीं है।

महंगाई झेल रहे लोग

मिर्जापुर-कलान क्षेत्र के व्यापारियों को ट्रकों से सामान मंगवाना पड़ता है। आने-जाने में करीब सौ किलोमीटर का चक्कर काटने के कारण मालभाड़ा बढ़ जाता है। इसी वजह से व्यापारी ग्राहक को सामान मालभाड़ा जोड़कर ही देते हैं। कपड़ा, खाद्य सामग्री, कृषि उपकरण आदि के दाम में दो-तीन प्रतिशत तक का इजाफा हो जाता है। वहीं रोडवेज बसें न चलने से लोगों को डग्गामार वाहनों में ज्यादा भाड़ा देना पड़ता है।

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद

कोलाघाट के पक्के पुल से गुजरते बाइक सवार। संवाद


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