Shahjahanpur News: स्वास्थ्य के साथ कॅरियर भी संवार रहा योग

स्पोर्ट्स स्टेडियम हथौड़ा में योगासन करते छात्र-छात्राएं
शाहजहांपुर। योग न सिर्फ स्वास्थ्य संवारने में मददगार है बल्कि इसे कॅरियर के तौर पर भी अपनाया जा सकता है। खासतौर पर कोरोना काल के बाद लोगों में योग के जरिये खुद को फिट रखने की आदत बनी है। वहीं दूसरी ओर तमाम युवा योग प्रशिक्षक के रूप में कॅरियर बना रहे हैं। इनमें शाहजहांपुर जिले के युवा भी शामिल हैं। जिन्होंने अपनी योग साधना को अपना कॅरियर बनाया है।
योग वेलनेस सेंटर में योग प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं मृदुल गुप्ता
मृदुल गुप्ता वर्तमान में पुराने जिला अस्पताल स्थित योग वेलनेस सेंटर में योग प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। मृदुल बताते है कि उन्होंने 2014 में बीपीएड करने के दौरान योग पर अध्ययन किया। साल 2015-17 तक योग में ही मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (एमपीएड) कानपुर कैंपस से किया। साल 2017-18 में इलाहाबाद से पोस्ट ग्रेजुएशन भी योग से ही किया।
बरेली कॉलेज, बरेली से योग विषय से एमए की डिग्री प्राप्त की। साल 2019 में उनका चयन योग प्रशिक्षक के पद पर हुआ। बताया कि वह नौकरी के दौरान हजारों लोगों को योग के प्रति जागरूक कर चुके हैं। योग से संबंधित ओपीडी के माध्यम से यौगिक उपचार देते हैं। उनके द्वारा प्रशिक्षित बच्चे स्टेट और नेशनल लेवल पर कई राज्यों में आयोजित योगासन खेलों में प्रतिभाग कर जनपद का नाम रोशन करते हैं। 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा योग वेलनेस सेंटरों की समीक्षा की थी, जिसमें शाहजहांपुर के योग वेलनेस सेंटर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था।
योग से खुद की बीमारी की दूर, अब दूसरों को सिखा रहे
तिलहर के मोहल्ला भक्सी निवासी अखंड प्रताप शर्मा उर्फ रानू परमार्थी ने योगाभ्यास के साथ मार्शल आर्ट का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया और सन 2005 में ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर तक खेले। 2008 में स्वामी रामदेव के संपर्क में आकर प्रशिक्षण लिया। फिर गांवों में जाकर लोगों को निशुल्क योग प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बीसलपुर में योग प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। रानू बताते हैं कि 2009 में अभ्यास के दौरान उनकी गर्दन में फ्रैक्चर आ गया था। एक महीने तक बिस्तर पर लेटे रहे। डॉक्टरों ने मान लिया था कि इनका शरीर लकवाग्रस्त हो सकता है। खुद पर विश्वास रखते हुए उन्होंने प्राणायाम का अभ्यास नहीं छोड़ा और बिस्तर पर लेटे हुए अभ्यास करते रहे। कुछ ही दिनों में स्वस्थ होकर लोगों को योग प्राणायाम के प्रति जागरूक करने लगे। उन्होंने योग की शिक्षा प्राप्त की। अब योग को ही जीविकोपार्जन का माध्यम बना लिया है।
इस तरह बना सकते हैं योग में कॅरियर
योग करियर बनाने लिए नए पाठ्यक्रम के अनुसार बैचलर ऑफ योगा, मास्टर ऑफ योगा, मास्टर ऑफ साइंस योग से किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए जिले के युवाओं को बरेली, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, हरिद्वार में स्थित ऐसे महाविद्यालयों में प्रवेश लेना होगा जहां पर योग से संबंधित कक्षाएं संचालित होती हैं। इनके अलावा योग के माध्यम से कई तरह की थेरेपी और मसाज भी होती हैं। इनके लिए भी डिप्लोमा व प्रमाण पत्र प्राप्त कर कार्य शुरू कर सकते हैं।

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