बदायूं

मिनी ट्राॅमा सेंटर : बिल्डिंग तैयार, उपकरणों का अब भी इंतजार

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गंभीर मरीजों के इलाज को मई तक शुरू होना था 30 बेड का मिनी ट्राॅमा सेंटर

चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हो रही देरी, पूरा नहीं हो पा रहा प्रोजेक्ट

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों और घायलों के लिए मिनी ट्राॅमा सेंटर की बिल्डिंग तो बनकर तैयार हो गई, लेकिन मरीजों को उपचार के लिए चिकित्सा उपकरण अब तक यहां नहीं आ सके हैं। ऐसे में भवन बनने के डेढ़ माह बाद भी मिनी ट्रॉमा सेंटर शुरू नहीं हो पाया, जबकि इसके मई में शुरू होने का दावा किया जा रहा था।

जिला अस्पताल में गंभीर रूप से घायल या फिर गंभीर बीमारी के शिकार मरीजों को बेहतर उपचार दिए जाने के लिए मिनी ट्राॅमा सेंटर बनवाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसी में डायलिसिस यूनिट भी लगनी थी। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब साढ़े पांच करोड़ थी। काफी समय तक यह प्रस्ताव अधर में लटका रहा।

प्रस्ताव पास हुआ तो कार्यदायी संस्था ने जिला अस्पताल परिसर में इसको बनाए जाने के लिए भूमि का चयन किया। पिछले वर्ष जिला अस्पताल परिसर में इसका निर्माण कार्य शुरू कराया। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि 30 बेड का यह मिनी ट्राॅमा सेंटर मई तक चालू हो जाएगा। कार्यदायी संस्था ने मिनी ट्राॅमा सेंटर की बिल्डिंग तो तैयार कर दी, लेकिन अब तक यहां चिकित्सा उपकरण नहीं लगाए। इस वजह से यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है।

मिनी ट्राॅमा सेंटर में ये होनी है व्यवस्था

– डायलिसिस मशीन

– गुर्दे से लेकर खून और शरीर की सभी जांचों के लिए एनालाइजर

– आईसीयू, ताकि डायलिसिस के समय मरीज के बेहोश होने पर उसको यहां रखा जा सके

विशेषज्ञों की कमी पूरा करना भी एक चुनौती

जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी चल रही है। यहां लंबे अर्से से कोई कॉर्डियोलॉजिस्ट भी तैनात नहीं है। ऐसे में डायलिसिस के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट समेत कॉर्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक्स की टीम होनी चाहिए। पर, यहां विशेषज्ञों की तैनाती करना स्वास्थ्य विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

रोजाना 30 से 40 मरीजों को किया जाता है रेफर

जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों और घायलों को यहां इलाज के बेहतर इंतजाम न होने की वजह से रेफर किया जाता है। यहां से रोजाना औसतन 30 से 40 मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। ऐसे में अगर यहां मिनी ट्राॅमा सेंटर चालू हो जाएगा तो मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।

देरी के संबंध में कार्यदायी संस्था से किया जाएगा पत्राचार

मिनी ट्राॅमा सेंटर की बिल्डिंग लगभग तैयार हो चुकी है। इसमें डायलिसिस यूनिट भी लगाई जाएगी। सरकार और कार्यदायी संस्था के बीच ही इस सेंटर को बनाए जाने का अनुबंध हुआ है। हमें सीएमएस का चार्ज मिलने से पहले इस प्रोजेक्ट पर कार्य यहां शुरू हुआ था। इसमें जो भी उपकरण हैं वह कार्यदायी संस्था ही लगवाएगी। संचालन के बाद ही इसकी मॉनीटरिंग का जिम्मा हमको मिलेगा। इसमें किस वजह से देरी हुई है इसके लिए कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जाएगा। ताकि जल्द ही जरूरतमंदों के इस सुविधा का लाभ मिल सके।

– डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस- जिला अस्पताल


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