बरेली

हिंदुस्तानी मुसलमानों के पूर्वज भी मुसलमान : मुफ्ती सलीम

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बरेली। उर्स-ए-रजवी के अखिरी दिन इस्लामिया मैदान पर आला हजरत फाजिले बरेलवी के कुल शरीफ की महफिल सजाई गई। इस मौके पर मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि हिंदुस्तानी मुसलमानों के पूर्वज भी मुसलमान ही थे। कुछ लोग समाज में बेवजह भ्रम फैला रहे हैं। हम कुरान और हदीस को मानने वाले हैं। हमारा डीएनए हजरत आदम का है। मुसलमान इस मुल्क में किरायेदार नहीं, मालिक की हैसियत से हैं।

ये मुल्क जितना गैर मुस्लिमों का है, उतना ही मुसलमानों का भी है। जो जितना सच्चा मुसलमान होगा, वह उतना ही अपने मुल्क के प्रति वफादार होगा। जंग-ए-आजादी में मुसलमानों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सियासी पार्टियां अपने फायदे के लिए हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई पैदा कर रही हैं। मुसलमान नफरत का जवाब फूलों से दें।

इंग्लैंड से आए अल्लामा फरोग उल कादरी ने कहा कि यह इल्म का दौर है। मुसलमान अपने बच्चों को आलिम के साथ बैरिस्टर, इंजीनियर और डॉक्टर बनाएं। मुसलमानों तुम नाज करो कि अल्लाह ने तुम्हें हिंद की धरती पर पैदा किया है, जहां आला हजरत की जात है।

नबीरे आला हजरत सय्यद सैफ मियां ने भी शायराना अंदाज में खिराज पेश किया। नबीरे आला हजरत मुफ्ती अरसलान रजा खान ने कहा कि हर सदी में एक मुजद्दिद पैदा होता है। 14वीं सदी (इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक) के मुजद्दिद इमाम अहमद रजा खान थे। मुंबई से आए मुफ्ती सलमान अजहरी ने कहा कि पूरी दुनिया में नबी करीम पर जान फिदा करने वाली कोई जमात है तो वो बरेलवी जमात है। सुन्नियत की पहचान करनी है तो आला हजरत का नाम लेना होगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आला हज़रत के पीरखाने के सज्जादानशीन सय्यद नजीब मियां रहे। सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) और सदारत सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) ने की। संचालन कारी यूसुफ रजा संभली ने किया। महफिल को मुफ्ती कफील हाशमी, मौलाना इंतजार कादरी, मौलाना जाहिद रजा, कारी नेमतुल्लाह, मुफ्ती इमरान हनफी, मौलाना मुख्तार बहेड़वी व कारी सखावत हुसैन ने भी खिताब किया।


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