बाघिन की मौत का मामला: 10 दिन से भूखी-प्यासी थी… पत्थरों की बौछार, दहशत और लगातार भागने से थम गईं सांसें

कई घरों में घुसी थी बाघिन
– फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन मैलानी रेंज जंगल से निकलकर रामपुर ढकैया गांव में दहशत फैलाने वाली बाघिन भूख और प्यास से तड़पने के बाद सदमे से मरी थी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली की प्री पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है।
पोस्टमार्टम करने वाली टीम को उसके पेट में भोजन का एक भी अंश नहीं मिला। पानी भी नहीं था। टीम का अनुमान है कि वह बीते 10-15 दिन से भूखी थी। इस वजह से उसका शरीर कमजोर हो गया था। गांव में घुसने के बाद उस पर लगातार पत्थरों की बौछार होती रही। इससे बचने के लिए वह भागती रही। …और आखिरकार सदमे में उसकी मौत हो गई। सदमे की वजह तलाशने के लिए विसरा सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच में जुटे हैं।
शुक्रवार रात गांव में घुसी थी बाघिन
शुक्रवार की देर रात रामपुर ढकैया गांव में घुसी बाघिन की वजह से ग्रामीण 10 घंटे तक दहशत में रहे। सुबह बाघिन को ट्रेंक्यूलाइज करने की तैयारी थी। इससे पहले ही सुबह दस बजे उसकी मौत हो गई। अचानक मौत से वन विभाग के अफसर भी हैरान रहे, क्योंकि शरीर पर किसी गहरे जख्म के निशान नहीं थे। हालांकि, शरीर पर कुछ खरोंचें थीं। आशंका जताई जा रही थी कि ग्रामीणों ने अपने बचाव में बाघिन पर हमले किए होंगे।



