UP: अमरजीत कौर के साहस से हारा कैंसर, अब दूसरों को दे रहीं हिम्मत; स्मृति ईरानी ने जानी संघर्ष की कहानी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ अमरजीत कौर का परिवार
– फोटो : अमर उजाला
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कैंसर का नाम सुनते ही लोग के होश फाख्ता हो जाते हैं, लेकिन पीलीभीत में शारदा पार के गांव बमनपुर भागीरथ निवासी अमरजीत कौर ने 10 साल तक संघर्ष कर रक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हरा दिया। दिल्ली के आकाशवाणी के प्रसारण भवन में मंगलवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमरजीत कौर से मुलाकात कर उनके संघर्ष भरे जीवन की जानकारी ली।
अमरजीत कौर को वर्ष 2013 में रक्त कैंसर हुआ था। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का महंगा इलाज कराने की परिवार की स्थिति नहीं थी। पति अमरजीत सिंह बाइक मिस्त्री हैं। उनकी कमाई से घर का खर्च ही जैसे-तैसे चल पाता है। अमरजीत का इलाज परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। बावजूद इसके दंपती ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाए रखा। जैसे-तैसे रुपयों की व्यवस्था कर दिल्ली के एम्स पहुंचे और डॉक्टर को दिखाया।
डॉक्टर ने कर दिया था मना
अंतिम स्टेज होने पर डॉक्टर ने पहले तो मना कर दिया। पति की गुहार के बाद डॉक्टर ने इलाज शुरू किया। दो साल तक दवाइयां चलीं। आगे इलाज के लिए पांच लाख रुपये का खर्च था। गरीबी की हालत देखते हुए एम्स के डॉ. अजय गोगिया ने राष्ट्रीय आरोग्य निधि से इलाज कराने की सलाह दी। पति अमरजीत सिंह ने तत्काल एम्स की नीतू भाष्कर से संपर्क कर योजना के लिए आवेदन किया। वर्ष 2014 में पांच लाख का फंड जारी होने के बाद अमरजीत की बहन से उनके शरीर में बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया गया।
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