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UP Nikay Chunav: बरेली में बड़े दलों की मुश्किल बढ़ा सकते हैं छोटे दल, इस बार ओवैसी की पार्टी भी मैदान में

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small parties repeat their previous performance in the elections then the challenge of the big parties will i

यूपी नगर निकाय चुनाव
– फोटो : अमर उजाला

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बरेली में छोटे दल और निर्दलीयों ने पिछले निकाय चुनाव के प्रदर्शन को दोहराया तो बड़े दलों के लिए चुनौती और कठिन हो जाएगी। छोटे दलों में कुछ इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, मगर ओवैसी की पार्टी इस चुनाव में दांव आजमा रही है। छोटे दल भले ही खुद जीतने की स्थिति में नहीं है, लेकिन बड़े दलों का गणित बिगाड़ने में इनकी भूमिका अहम हो जाती है। ये दल नगर निगम के अलावा नगर पंचायतों और पालिकाओं में भी अपना दमखम दिखा रहे हैं।

इस बार के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दलों के बीच भले ही मुख्य मुकाबला होने के आसार दिख रहे हों, लेकिन राजनीतिक पंडितों की माने तो छोटे दल और निर्दलीय 2017 के चुनाव से भी बेहतर परिणाम लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मेयर पद के लिए इस बार भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा एआईएमआईएम और आम आदमी पार्टी समेत 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि 2017 के चुनाव में 18 प्रत्याशी मैदान में थे। 

इस बार निर्दलीयों की संख्या कम 

इस बार निर्दलीयों की संख्या कम है, जबकि पिछली बार 18 में 10 प्रत्याशी निर्दलीय थे। इस बार निर्दलीय सिर्फ छह प्रत्याशी ही हैं। ये निर्दलीय और छोटे दलों के प्रत्याशी हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। इनके प्रदर्शन का नुकसान बड़े दलों को पहले भी उठाना पड़ा है और आगे भी उठाना पड़ सकता है। पार्षद सीट पर भी छोटे दल और निर्दलीय किस्मत आजमा रहे हैं। यहां भी अगर इनका प्रदर्शन अच्छा रहा तो निकायों की बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठकों में बड़े दलों के लिए चुनौती बनेंगे।


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