हरदीप पुरी को क्यों रियल एस्टेट सेक्टर के रेगुलेटर रेरा को लेकर ये नसीहत!
रियल एस्टेट सेक्टर: बिल्डरों के दिमाग पर लगाम कसने, होमबायर्स को उनके आतंक से खतरा और सेक्टर में दावेदारी पेश करने के लिए 2016 में संसद में रेरा कानून (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) पास हुआ। इस कानून के बनने के बाद सभी राज्यों को अपने यहां रियल एस्टेट सेक्टर के लिए रेग्यूलेटरी मार्किटेशन का गठन करना था। रेरा कानून के अस्तित्व में आने के बाद बिल्डर लग जाते हैं कि सफलता मिल गई है तो होमबायर्स को जबरदस्त फायदा हुआ है। लेकिन रेरा को लेकर इन दिनों सेंट्रल हाउसिंग मिनिस्ट्री और उपभोक्ता मामलों के मिनिस्ट्री के बीच एक्सक्लूसिव चल रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, वास्तव में रियल एस्टेट सेक्टर में मुश्किलों का सामना कर रहे होमबायर्स की समस्या को दूर करने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में स्टेकहोल्डर्स के साथ एक बैठक की है। ये बैठक मंत्रालय तब की है जब यथास्थिति में वास्तविक संपत्ति नियामक लक्षण या रेरा अस्तित्व में समाप्त हो गया है और ये हाउसिंग मंत्रालय के तहत आता है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मंत्री पीयूष गोयल हैं। इसी पर हाउसिंग मिनिस्ट्री के हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी समस्या का निदान निकालने के लिए रियल एस्टेट रेग्यू लैटरी नोटिस का गठन किया गया है ऐसे में दूसरे सरकारी उपक्रम या मंत्रालयों को कस्टमर्स को फोटोग्राफर खरीदारी करने के लिए बढ़ावा देने के लिए इससे ग्राहकों को अपनी समस्या को लेकर अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ सकता है। उन्होंने केंद्रीय सलाहकार परिषद की बैठक में ये बातें कही हैं।
रेरा के अस्तित्व में आने के बाद कंज्यूमर कमीशन में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी संभावनाओं में भारी कमी आई है। इसके बावजूद आयोग को मिलने वाले कुल मिलाकर 10 प्रतिशत हिस्सा वास्तविक संपत्ति सेक्टर से है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने होमबायर्स के चुटकुले को ध्यान में रखते हुए बिल्डर-बॉयर एग्रीमेंट के मॉडल प्राविजनों का अध्ययन करने के लिए पैनल का गठन किया है।
जिस पर हरदीप पुरी ने कहा कि अगर कंज्यूमर कमीशन इतना ही प्रभावी होता है तो रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी स्पष्टीकरण यानी रेरा बनाने की ट्रेन के लिए फॉलो नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सेक्टर से जुड़ी समस्या का हल उसी में उठाया गया है जिसके लिए वह वो भी बनाया गया है जब संसद से कानून बनाया गया है। हरदीप पुरी ने कहा कि रेरा को जब चुनौती दी गई तो कानून की लड़ाई भी हमने देखा है ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े मुद्दों को लेकर दूसरे समझौते को हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
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