शाहजहाँपुर

विश्व गिद्ध जागरूकता दिवस आज : चार साल से नहीं दिखे जिले में गिद्ध

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World Vulture Awareness Day today: Vultures not seen in the district for four years

डीएफओ प्रखर गुप्ता

शाहजहांपुर। जनपद में पिछले चार वर्षों से एक भी गिद्ध नहीं देखा गया है। वन विभाग के आंकड़े भी जिले में गिद्धों की संख्या को शून्य ही बताते हैं।

डीएफओ प्रखर गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष सितंबर के पहले शनिवार को गिद्ध जागरूकता दिवस मनाया जाता है। जिले में पिछले चार साल से गिद्ध नजर नहीं आए हैं। हालांकि डीएफओ यह जानकारी नहीं दे सके कि चार साल पहले जिले में गिद्धों की संख्या क्या थी। बताया जा रहा है कि चार साल पहले जिले में 40 गिद्ध बचे थे। धीरे-धीरे कर सभी गिद्ध खत्म हो गए।

डीएफओ ने बताया कि गिद्ध मृत प्राणियों के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह वे अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्यों की सहायता करते हैं और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाते हैं। अलग-अलग समुदायों में गिद्धों का एक अलग सांस्कृतिक-धार्मिक महत्व है। यदि प्रकृति में ये सफाईकर्मी पक्षी न हों तो मरे हुए जानवरों की मांस की सड़न से बीमारियां फैलने लगें।

पर्यावरण से जैविक कचरे के अत्यधिक कुशल निपटान के माध्यम से पोषक तत्वों के चक्रण में वे जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस आशय से जनपद की समस्त रेंजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें लोगों को बताया जाएगा कि पेन किलर दवा का उपयोग न करें।

डीएफओ ने बताया कि जानवरों को डिक्लोफेनाक दवा दी जाती है। पशु के मरने के बाद जब गिद्ध उनका मांस खाते हैं तो इससे गिद्धों की मौतें हुईं। इसके बाद गिद्ध विलुप्त होते चले गए। गिद्धों का प्राकृतिक आवास छिनने से भी इनकी संख्या में कमी आई।

आज होंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिले की सीमा दुधवा टाइगर रिजर्व एवं पीलीभीत टाइगर रिजर्व से भी मिलती है। यहां गिद्ध बहुतायत में पाए जाते हैं। इसी के चलते शनिवार को शाहजहांपुर में भी जागरूकता कार्यक्रम कराए जाएंगे। प्रतिवर्ष सितंबर के प्रथम शनिवार को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य पर वन विभाग की ओर से समस्त रेंज कार्यालयों में विचार गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।

गिद्ध प्रकृति के लिए क्लीनर के रूप में काम करते हैं। यदि गिद्ध न रहे तो प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाएगा। ऐसे में गिद्धों का संरक्षण करना बेहद जरूरी है। शाहजहांपुर में गिद्ध की संख्या शून्य है।

– प्रखर गुप्ता, डीएफओ


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