Bareilly News: हादसे के बाद भूले जिम्मेदार, प्लेटफाॅर्म पर खतरा बरकरार
बरेली। जंक्शन के प्लेटफाॅर्म नंबर दो पर 2 जनवरी को जब एमबीए की छात्रा आकांक्षा यादव का पैर कटा तो मंडल के तकनीकी अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया था। जांच में पता चला कि ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच गैप ज्यादा होने से हादसे हो रहे हैं। प्लेटफार्म को ऊंचा करने या फिर ट्रैक को नीचा करने की संस्तुति की गई, लेकिन पांच माह बाद भी स्थिति जस की तस है। हादसे रोकने के लिए कोई काम नहीं कराया गया।
शुक्रवार को ओडिशा में हुए रेल हादसे के बाद एक बार फिर रेलवे से जुड़ी उन तमाम कमियों पर चर्चा होने लगी जो हादसे की वजह बन सकती हैं। यात्री बोले- सुरक्षा का दम भरने भर से काम नहीं चलेगा। यात्रियों की संख्या के हिसाब से कोच कम हैं। ट्रेनों में चढ़ने-उतरने के समय आपाधापी आम बात है। ऐसे में अगर प्लेटफाॅर्म ऊंचा-नीचा होगा तो मुश्किल तो होगी ही। जंक्शन पर शनिवार को अधिकारी-कर्मचारी ओडिशा की घटना पर बातचीत में व्यस्त दिखे।
यात्री कह रहे थे कि क्या अफसर यहां भी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। ट्रेनों में भीड़ होने पर प्लेटफॉर्म और कोच के पायदान की ऊंचाई में अंतर यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हादसों की वजह चिह्नित कर उन्हें दूर किया जाना बेहद जरूरी है।
प्लेटफाॅर्म नंबर दो का हाल
ट्रेन आने पर पायदान की दो सीढि़यां प्लेटफाॅर्म के नीचे आ जाती हैं। तीसरी सीढ़ी भी लेवल में आने के बजाय थोड़ा ऊपर रह जाती है। इससे ट्रेन में चढ़ने-उतरने के दौरान गिरने का खतरा रहता है। स्थलीय जांच में रेलवे अभियंताओं ने भी माना था कि प्लेटफाॅर्म यात्री सुरक्षा के मानकों के अनुरूप नहीं है।



