बदायूं

Budaun News: लेखपाल को नजर नहीं आई तालाब की 20 फुट खोदाई

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दातागंज (बदायूं)। तहसील क्षेत्र के गांव मैरी बजर मैरी में गंगा एक्सप्रेस-वे के ठेकेदार ने नियम विरुद्ध तालाब से मिट्टी की खोदाई करा दी थी। इससे तालाब करीब 20-25 फुट गहरा हो गया था, जो कि ग्रामीणों के लिए खतरा बन गया था। ऐसी शिकायत ग्रामीणों ने एसडीएम से की थी। एसडीएम ने इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल से रिपोर्ट तलब की थी। जांच रिपोर्ट में लेखपाल ने ग्रामीणों को शिकायत को गलत बताया है। लेखपाल ने रिपोर्ट में लिखा है कि गंगा एक्सप्रेस के ठेकेदारों ने तालाबों की ज्यादा खोदाई नहीं कराई है।

ग्राम मैरी बजर मैरी के प्रधान भोजराज और गांव के तमाम लोगों ने 27 मई को तहसील पहुंचकर एसडीएम से शिकायत की थी कि उनके गांव में गाटा संख्या एक, दो, तीन, चार, सात, आठ, नौ व 12 तालाब के रूप में दर्ज हैं। काफी समय पहले जिला प्रशासन ने यह तालाब मछली पालन के लिए ग्रामीणों को दिए थे। कुछ समय तक ग्रामीणों ने मछली पालन भी किया था, लेकिन हाल में यह तालाब सूख गए थे। गांव के नजदीक में गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण चल रहा है। उस पर मिट्टी डालने के लिए नियम विरुद्ध इन तालाबों से 20-25 फुट गहराई तक खोदाई कराई गई है।

ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने लेखपाल हारिश अली को इसकी जांच सौंपी थी। अब लेखपाल ने अपनी जांच करते हुए उसकी रिपोर्ट एसडीएम को दे दी है। जानकारी के अनुसार, लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में ग्रामीणों की शिकायत को गलत ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तालाबों में मानक के अनुसार ही खोदाई कराई गई है। खोदाई से तालाबों को कोई क्षति नहीं पहुंची है। लेखपाल की रिपोर्ट से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मामले की अन्य अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीण बोले, लेखपाल को नजर नहीं आया गहरा गड्ढा

ग्रामीणों का कहना है कि लेखपाल ने अधिकारियों का गुमराह किया है। ग्रामीणों ने तो मौके पर बांस के जरिये गहराई नापते हुए फोटो कराकर अधिकारी को उपलब्ध कराए थे, बावजूद उसके लेखपाल को गहराई सही नजर आ रही है तो अधिकारियों के एक बार अन्य किसी से या फिर खुद आकर यथास्थिति देखनी चाहिए।

तालाबों की गहराई का कोई मानक नहीं

मैरी बजर मैरी के ग्रामीणों ने जो शिकायत की थी। उसकी लेखपाल से जांच कराई गई है। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। वैसे तालाबों की गहराई का कोई मानक नहीं है। अगर मिट्टी खेत से उठाई जाती तो मानकों का ख्याल रखना होता। इन तालाबों की खोदाई कराने से कम से कम उन पर अवैध कब्जे नहीं होंगे।

– धर्मेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम


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