Budaun News: निजी अस्पतालों में मरीज ले गईं आशा कार्यकर्ता तो खैर नहीं
बदायूं। जिला महिला अस्पताल से रोजाना बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता निजी अस्पतालों में मरीज ले जाती हैं। इससे निजी अस्पताल वाले सामान्य प्रसव की जगह ऑपरेशन कर प्रसूताओं के तीमारदारों से मोटी रकम वसूलते हैं। इसमें 30 से 35 प्रतिशत आशा कार्यकर्ता का कमीशन होता है। टीम ने अब तक ऐसी 41 आशा कार्यकर्ताओं को चिह्नित कर लिया है।
जिला महिला अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहता है। जिला महिला अस्पताल में जैसे ही कोई गर्भवती आती है तो उसको यहां पर सही इलाज न मिलने की बात कहते हुए वह अपने सांठगांठ वाले निजी अस्पतालों में ले जाती हैं। निजी अस्पताल में जाने के बाद सामान्य प्रसव की स्थिति में भी उनको ऑपरेशन से प्रसव बता दिया जाता है। निजी अस्पतालों से उनको हर प्रसव पर मोटा कमीशन मिलती है। इस तरह का खेल काफी समय से यहां चल रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ भी प्रसूताओं को नहीं मिल पाता है।
ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कसने के लिए सीएमओ ने टीमें गठित की हैं, जो आशा कार्यकर्ताओं की निगरानी कर रही हैं। टीमें अब तक 41 ऐसी आशा कार्यकर्ताओं को चिह्नित कर चुकी हैं, जो मरीजों को जिला अस्पताल से निजी अस्पतालों में ले जाती हैं। यहां बता दें कि बात पक्की हो जाने पर आशा कार्यकर्ताओं के फोन पर ही निजी अस्पताल वाले जिला अस्पताल परिसर में वैन भी भेज देते हैं।
मरीजों की खींचतान के चलते होता है हंगामा
जिला महिला अस्पताल में आए दिन आशा कार्यकर्ता मरीजों की खींचतान करती हैं, इससे कई बार मारपीट और हंगामा भी हो जाता है। अस्पताल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन जाता है। इससे अब आशा कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कसा जा रहा है।
आशा कार्यकर्ताओं की शिकायतें ज्यादा मिल रही हैं। इस वजह से विशेष टीमों का गठन किया गया है, ताकि उनकी निगरानी कर विभागीय कार्रवाई की जा सके। ऐसा करने का मकसद मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना मात्र है।
– डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ


