क्या चाहते हो तुम्हारे हाथ में चाकू हो या फिर कलम: आजम
शाहबाद (रामपुर)। सपा नेता आजम खां ने चाकू को रामपुर की पहचान बनाए जाने पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि 40 सालों की मेहनत के बाद मैंने रामपुर की पहचान चाकू के बदले कलम को बनाया था, लेकिन अब यहां 80 लाख का चाकू स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने लोगों से पूछा क्या चाहते हो तुम्हारे हाथों में क्या कलम या फिर चाकू।
आजम खां शनिवार को शाहबाद के मोहल्ला जिलेदरान में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रामपुर के लोगों पर बहुत जुल्म हुआ है। यहां किसी को पढ़ने की इजाजत नहीं थी। मैंने बच्चों के पढ़ने का इंतजाम किया। इसके लिए अपनी झोली फैलाकर एक-एक पैसे जमा किया। कहा कि मांगने वाला क्या लाता है, खाली हाथ। उस खाली हाथ पर कोई वोट रख देता है। कोई नोट रख देता है, कोई थूक देता है, कोई अंगारा रख देता है। उन सब को समेटकर तुम्हारे बच्चों के लिए कलम खरीदकर लाया। हमारे हाथों की कद्र नहीं करोगे, तो अगला हाथ फैलाने वाला पैदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम पर इतने मुकदमे क्यों लादे गए हैं। सिर्फ इसलिए मैंने कमजोरों के बच्चों के लिए पढ़ने का इंतजाम किया। यूनिवर्सिटी बनवाई और स्कूल खोला। मैंने चाहता था कि आपका बच्चा पंक्चर जोड़ने का काम न करे। मेरी इच्छा है कि रामपुर के बच्चे पढ़कर डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनें। इसके बदले मुझे क्या मिला। जेल की कोठरी, जिसमें मैं और मेरा बेटा 27 माह तक बंद रहे। मेरी पत्नी बगल की कोठरी में बंद थी। जेल में गिरने से उनका हाथ टूट गया था, लेकिन मुझे मिलने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने कहा कि दुनिया तुम्हारी बर्बादी की मौके की तलाश में है। सात समंदर पार से कोई भी कलम देने तुम्हारे हाथ में नहीं आएगा। तुम्हारी अंधेरी तकदीर में उजाला कहां से आएगा। तुम ही अपने रास्तों को तय नहीं करोगे तो तुम्हारा रास्ता बनाने वाला भी कोई नहीं आएगा।

