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Bareilly News: डॉ. गूगल से पूछ रहे इलाज, मिला रहा तनाव

Connect News 24

बरेली। कहते हैं कि इंटरनेट के पास हर सवाल का जवाब है। इसी वजह से लोग गूगल को डॉक्टर भी मान बैठे हैं। हर तरह की बीमारी का इलाज डॉ. गूगल से पूछने लगे हैं। दो-तीन छींक आईं या सिरदर्द हुआ तो गूगल पर सर्च कर लिया। परिजन या दोस्त की बीमारी का पता चला तो तुरंत उसकी गंभीरता ढूंढने लग गए। इंटरनेट पर बीमारी और उसका इलाज ढूंढने की प्रवृत्ति लोगों को तनावग्रस्त बना रही है। मनोचिकित्सकों ने इसे मानसिक बीमारी की श्रेणी में रखा है।

इस दशा को साइबरकांड्रिया कहते हैं। साइबरकांड्रिया साइबर और हाइपरकांड्रिया शब्दों से मिलकर बना है। इसमें इंटरनेट पर बीमारियों के बारे में पढ़ने की लत लग जाती है। वह अपने शारीरिक बदलाव को गूगल पर मिली जानकारी के आधार पर किसी न किसी बीमारी से जोड़ने लगता है। उसका इलाज भी इंटरनेट पर खोजता है। गूगल उसे तरह-तरह के मेडिकल शब्दों के बारे में बताता है। उसे महसूस होने लगता है कि वह किसी बीमारी से पीड़ित है। एक अध्ययन के मुताबिक, दुनिया भर में 61 प्रतिशत लोग इंटरनेट पर अपनी बीमारी के बारे में पढ़ते हैं।

केस-1

नवाबगंज की 50 वर्षीय महिला अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में ऑनलाइन पढ़ती थीं। उन्हें लगता था कि इस उम्र में उन्हें मधुमेह या थायरॉयड की बीमारी होना लाजमी है। उन्होंने गूगल पर पढ़कर दवाएं लेना शुरू कर दिया। दवाइयों का गलत असर होने पर बच्चों ने उन्हें समझाया। इसके बाद उन्होंने आदत पर काबू पाने का प्रयास किया। आखिरकार डॉक्टर से इलाज कराना पड़ा।

केस-2

राजेंद्र नगर की 20 वर्षीय युवती ने इंटरनेट पर पढ़ा कि लंबी गर्दन वालों को गर्दन खुली रखने से खांसी हो जाती है। इससे उन्हें यकीन हो गया कि उनको खांसी-जुकाम मौसम बदलने से नहीं बल्कि गर्दन खुली रखने से होता है। वह गर्मियों में भी गर्दन को स्कार्फ से ढककर रखने लगीं। इसके बाद इंटरनेट से पढ़कर दवाएं मंगानी शुरू कर दीं। बीमारी बढ़ने पर काउंसलिंग कराई गई। इसके बाद उनकी गलतफहमी दूर हुई।

केस-3

महानगर के 38 वर्षीय शख्स को लॉकडाउन में महसूस हुआ कि वह कुछ ज्यादा शांत रहते हैं। इंटरनेट ने बताया कि वह अवसाद से पीड़ित हैं। इसके बाद उनकी चिंता और बढ़ गई। इंटरनेट पर ही वह इलाज ढूंढने लगे। पूरा दिन अकेले रहने लगे। परिवार वालों के समझाने के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया। उन्हें विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। इसके बाद भी उन्हें सामान्य होने में काफी समय लग गया।

शुगर, ब्लडप्रेशर और डिप्रेशन सबसे ज्यादा सर्च

गूगल पर सबसे ज्यादा ढूंढी जाने वाली बीमारियों में शुगर, ब्लडप्रेशर और डिप्रेशन शामिल हैं। लोग अपने बदलते मूड के अनुसार जानकारी प्राप्त करते हैं। इसका इलाज भी गूगल से ही पता करने का प्रयास करते हैं। कुछ तो गूगल की बताई दवाओं का इस्तेमाल करते हैं और बीमारी ठीक करने के बजाय बढ़ा लेते हैं।

साइबरकांड्रिया के लक्षण

-किसी एक विषय के बारे में विभिन्न एप पर अधिक समय तक पढ़ना।

-पढ़ते समय चिंता की वजह से सिर भारी होना।

-शरीर में बदलाव महसूस करना।

-डॉक्टर की दवाइयों की ऑनलाइन जांच करना।

-पूरे दिन बेचैनी और थकान महसूस होना।

वर्जन

वहम का कोई इलाज नहीं हैं। उसे कम किया जा सकता है। अपनी समस्या का समाधान इंटरनेट पर खोजने के बजाय डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। प्रकृति से जुड़े रहना और घर में सकारात्मक माहौल रखना बेहतर उपाय है। खेलकूद, योग और ध्यान को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना चाहिए।

डॉ. सुविधा शर्मा, साइकोलॉजी विभागाध्यक्ष, बरेली कॉलेज


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