Budaun News: चंद्रयान-3 में बदायूं के सत्यपाल ने निभाई अहम भूमिका

सत्यपाल सिंह अरोरा।
बदायूं/उझानी। बुधवार शाम को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर उतरकर इतिहास रचा तो करोड़ो देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। चंद्रयान- 3 के लांच व्हीकल के दूसरे चरण लिक्विड प्रोपल्सन के इंचार्ज की महत्वपूर्ण भूमिका उझानी निवासी सत्यपाल सिंह अरोरा ने निभाई। उनकी इस उपलब्धि से जिले के लोग खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
उझानी के मोहल्ला भदवारगंज के मूल निवासी सत्यपाल अरोरा ने बताया कि वह इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। महात्मा गांधी पालिका इंटर कॉलेज उझानी से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और इसके बाद वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल चले गए। इसके बाद 2007 में ऑल इंडिया साइंटिस्ट की परीक्षा पास कर इसरो से जुड़ गए। वह चंद्रयान के दूसरे चरण लिक्विड प्रोपल्सन की टेस्टिंग और एनालिसिस के इंचार्ज रहे हैं। उनके निर्देशन में करीब 60 लोगों की टीम ने इस पर काम किया है।
यह है लिक्विड प्रोपल्सन
चंद्रयान-3 को चांद तक ले जाने के लिए एलएमवी-3 (लांच व्हीकल माड्यूल-3) का इस्तेमाल किया गया है। यह लांच व्हीकल का एडवांस वर्जन है, जो भारी सेटेलाइट या रॉकेट को ले जाने के लिए इस्तेमाल होता है। दरअसल किसी भी सेटेलाइट को अंतरिक्ष तक भेजने के लिए लांच व्हीकल की जरूरत होती है। इस लांच व्हीकल के तीन चरण होते हैं। पहले चरण को सॉलिड प्रोपल्सन कहा जाता है। सत्यपाल के अनुसार, यह किसी भी सेटेलाइट या रॉकेट को पृथ्वी के वातावरण से निकालने में मदद करता है। दूसरा और तीसरा चरण लिक्विड प्रोपल्सन कहलाते हैं। चूंकि पृथ्वी से निकलने के बाद वैक्यूम होता है और वहां ज्यादा पावर की जरूरत होती है, ऐसे में यह काम आता है।
चंद्रयान-2 में भी रही थी महत्वपूर्ण भूमिका
सत्यपाल की पत्नी रंजू अरोरा कन्याकुमारी में वरिष्ठ शिक्षक हैं। सत्यपाल अपनी पत्नी तथा छह साल की बेटी के साथ इसरो परिसर में ही रहते हैं। चंद्रयान-2 में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसमें भी उन्होंने लांच व्हीकल का निर्देशन किया था। बुधवार को जहां चंद्रयान-3 पर पूरी दुनिया की नजर रही, वहीं इसमें उनकी भूमिका होने पर जिले के लोग भी गदगद हैं।