Bareilly News: युवाओं के सपनों को झटका, ऋण का प्रस्ताव बैंकों में अटका
बरेली। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत उद्यमी बनने से पहले आवेदकों की उम्मीदों को झटका लग गया। कर्ज लेकर रोजगार स्थापित करने के इच्छुक युवाओं के आवेदन को उद्यान विभाग ने तो स्वीकृत कर दिया, लेकिन बैंकों ने अड़ंगा लगा दिया। 56 आवेदन बैंकों की विभिन्न शाखाओं में लंबित हैं। आवेदक भटक रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी ने सीडीओ व जिलाधिकारी को अवगत कराया है। बैंकवार समीक्षा कर ऋण दिलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये का ऋण और 10 लाख रुपये अनुदान मिलता है। बैंक के ब्याज पर राज्य और केंद्र सरकार तीन-तीन प्रतिशत अनुदान देती हैं।
संजयनगर निवासी डेयरी संचालक गौतम यादव ने पनीर और घी तैयार करने की यूनिट के लिए 6.92 लाख रुपये ऋण के लिए आवेदन किया। औपचरिकताएं पूरी होने के उपरांत बैंक अधिकारियों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण भी किया। वे सिर्फ आश्वासन देते रहे, ऋण आज तक नहीं मिला। उद्यान विभाग की ओर से पैरवी कर रहे फैसिलिटेटर अभय अग्रवाल ने बताया कि वह बैंक के संपर्क में हैंं, ताकि अड़चनें दूर हो सकें।
भोजीपुरा के डेयरी संचालक वाहिद हुसैन अंसारी ने दुग्ध प्रसंस्करण इकाई के लिए 20 लाख रुपये ऋण मांगा। उद्यान विभाग ने स्वीकृति देते हुए आवेदन बैंक के पास भेज दिया। बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की। वाहिद के पास जमीन है। वह दो लाख रुपये मार्जिन मनी देने में भी सक्षम हैं पर ऋण नहीं मिला। वाहिद हुसैन ने बताया कि इंतजार कर रहे है। बैंक वाले आश्वासन देकर गए थे पर हुआ कुछ नहीं।
भोजीपुरा के चुन्नीलाल अरोरा ने चक्की और स्पेलर लगाने के लिए आवेदन किया था। आईटीआर न होने से मामला अटक गया। जमील को आटा टक्की के लिए ऋण चाहिए। उनके पास भी आईटीआर नहीं है। उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई तो फिर आईटीआर के नाम पर क्यों अटकाया जा रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्र में किसान आमतौर पर आआईआर नहीं भरते। इस नियम में ढील देने की जरूरत है।
कोट
उद्यान विभाग के माध्यम से योजना संचालित है। एचडीएफसी बैंक में सबसे ज्यादा 46 आवेदन लंबित हैं। साप्ताहिक समीक्षा में बैंकर्स से संवाद कर अड़चनों को दूर करा रहे हैं। – पुनीत पाठक, जिला उद्यान अधिकारी
बैंकर्स के साथ संवाद करके अड़चनों को दूर करा रहे हैं ताकि समय से ऋण देने का लक्ष्य पूरा हो और रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो सके। – तेजवंत सिंह, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी
इसलिए आ रही अड़चन
एचडीएफसी बैंक के क्लस्टर हेड आशीष मेहरोत्रा ने बताया कि लाभार्थी चार की जगह पांच-सात वर्षों में बैंक चुकाने की छूट चाहते थे, लेकिन योजना के सिस्टम में इसकी फीडिंग नहीं हो पा रही थी। इसलिए आवेदन फंसे। दो वर्ष का आईटीआर होना जरूरी है। कई लोगों ने दो वर्ष के आईटीआर हाल में ही भर दिए जबकि दोनों में छह माह का अंतर होना चाहिए। जिन आवेदनों में कोई अड़चन नहीं थी, बैंक ने उन्हें स्वीकृत कर दिया है।



