इंसान को मुकम्मल बनाने के लिए कला-संस्कृति जरूरी : वसीम बरेलवी
बरेली। श्रीराममूर्ति स्मारक रिद्धिमा में बुधवार को तीसरे थिएटर फेस्टिवल इंद्रधनुष का आगाज हुआ। इस बार इंद्रधनुष बरेली में रंगमंच के संस्थापक जेसी पालीवाल को समर्पित किया गया है। इस मौके पर मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने कहा कि इंसान को मुकम्मल बनाने के लिए कला और संस्कृति जरूरी है। उन्होंने अंत में एक शेर पढ़ा- बस में तेरे जब तक है किए जा ड्रामा, हर शख्स तेरी तरफ देख रहा है…।
कार्यक्रम में रिद्धिमा प्रोडक्शन की प्रस्तुति ”मैं अधर्मी क्यूूं… रावण’ का मंचन हुआ। अश्विनी कुमार लिखित और शैलेंद्र शर्मा निर्देशित नाटक में रावण के चरित्र का चित्रण किया गया। रावण के बाल रूप की भूमिका लविश, युवा निर्देशक शैलेंद्र शर्मा ने और युद्ध के समय की भूमिका विनायक श्रीवास्तव ने निभाई।
इससे पूर्व फेस्टिवल का शुभारंभ जेसी पालीवाल के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, ट्रस्ट सेक्रेटरी आदित्य मूर्ति, एअरमार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. एलएस मौर्य, डॉ. जसप्रीत कौर, डॉ. रीता शर्मा आदि ने इंद्रधनुष की स्मारिका का विमोचन किया गया। इस दौरान आशा मूर्ति, रजनी अग्रवाल, अशोक गोयल, डॉ. वंदना शर्मा, दानिश खान मौजूद रहे। 26 अक्तूबर को ”लाल किला का आखिरी मुकदमा’ नाटक का मंचन शाम चार बजे और साढ़े छह बजे किया जाएगा।
इन्होंने निभाया किरदार
मोहसिन (राम व विष्णु), फरदीन (लक्ष्मण), सूर्यप्रकाश (नारद), आस्था शुक्ला (शूर्पणखा), पूनम पाठक (मंदोदरी), शिवा (ऋषि विश्रवा) आशुतोष (शुक्राचार्य), सुबोध शुक्ला (सुमाली), कुंवरपाल (राजा अनरण्य), अभिनव (जामवंत) बने।


