Rampur News: संत सम्मेलन में लगे भारत माता के जयकारे
रामपुर। पीपली वन स्थित पौराणिक सिद्धपीठ श्री मां बाल सुंदरी मंदिर के परिसर में शनिवार को हुए संत सम्मेलन में देशभर के कोने-कोने से साधु-संत शामिल होने पहुंचे। साधु-संतों के आगमन से पीपली वन भगवामय हो गया। संतों को देखने और प्रवचन सुनने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने विश्व शांति एवं समाज के प्रति साधुओं का दायित्व बताते हुए सभी देशवासियों को भारत माता की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान भारत माता के जयकारे गूंज उठे। संत सम्मेलन मं जूना अखाड़े के दूर-दूर से संतों ने पृथ्वी की सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण और उनकी सुरक्षा की बात कही। सम्मेलन क संचालन कर रहे नैमिषारण्य से आए संत नारायण गिरि ने पीपली पौराणिक सिद्धपीठ के इतिहास के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। इसके बाद संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी अवधेशानंद ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सहित पक्ष और विपक्ष के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन में पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक महंत हरिगिरि महाराज, स्वामी कपिल पुरी महाराज और महंत रवींद्रपुरी महाराज आदि ने अपने प्रवचन में समाज सेवा, राष्ट्रसेवा और धर्म के पालन का आह्वान किया। प्रवचन सुनने के लिए जिले के साथ उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए संत समाज द्वारा जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय महासचिव मोहन भारती की प्रशंसा की गई।
साधु-संतों को किया गया सम्मानित
जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय महासचिव मोहन भारती ने संत सम्मेलन में आए अतिथियों और सभी संतों को शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। साधुओं के अलावा प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, सांसद घनश्याम सिंह लोधी, सेवानिवृत डीआईजी एवं विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता कवींद्र प्रताप सिंह आदि सम्मानित किया गया। इस मौके पर जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज का श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बिलासपुर के ब्लॉक प्रमुख कुलवंत औलख, मिलक की ब्लॉक प्रमुख अर्चना गंगवार, रजनीश गुप्ता, राम सिंह मंडल अध्यक्ष, शुभांक गंगवार, इंदरजीत सिंह, सुखदेव सिंह जी, शमशेर सिंह, पुरनचंद और अंग्रेज सिंह आदि मौजूद रहे। सम्मेलन की व्यवस्था में जगदीश सिंह काम्बोज और समाजसेवी क्षितिज सुखीजा की भूमिका रही। संत सम्मेलन में रामपुर पुलिस के अलावा उत्तराखंड की पुलिस भी तैनात थी।


