Bareilly News: खुद जान देने पर उतारू था मैकूलाल, पत्नी को भी मार दिया
बरेली। सिरौली में पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाला मैकूलाल कुछ समय से चिड़चिड़ा व हद से ज्यादा झगड़ालू हो गया था। वह पहले भी अपनी जान देने की कोशिश कर चुका था। उसके स्वभाव की वजह से परिवार समेत पड़ोसियों ने उससे दूरी बना ली थी। इसकी वजह से वह सीमा को बचाने भी नहीं पहुंच सके।
मैकूलाल के दो छोटे भाई और मां थोड़ी दूर पर बने दूसरे घर में रहते हैं। मैकूलाल काफी समय से पत्नी के साथ दिल्ली में रहकर फैक्टरी में काम करता था। ग्रामीणों के मुताबिक मैकूलाल बचपन से ही गुस्सैल स्वभाव का था। इधर, दो माह से उसका मानसिक संतुलन भी ठीक नहीं था। वह आए दिन पत्नी से लड़ता था। कभी मां और भाइयों से उसका विवाद होता था तो कभी पड़ोसियों से मामूली बात पर भिड़ जाता था। इसलिए लोग उससे दूर ही रहने में भलाई समझते थे। सीमा ने पड़ोसियों को बताया था कि पति का दिल्ली के एक अस्पताल से मानसिक इलाज भी चल रहा है। कुछ दिन पहले उसने कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश की थी। तब समय पर इलाज मिलने से जान बच गई थी।
पत्नी-बच्चों को मेला और मंदिर भी घुमाया
पड़ोसियों के मुताबिक 15 दिन पहले सीमा बच्चों को लेकर दिल्ली से आई थी। कुछ दिन बाद मैकूलाल भी दिल्ली से चला आया। तब से लगभग रोज ही वह घर में क्लेश कर रहा था। कभी-कभार वह परिवार के लोगों से मिलजुलकर भी रहता था। बताया कि सोमवार को वह नानकमता गुरुद्वारे से आया था। रात में वह पत्नी-बच्चों को मेले में ले गया था। मंगलवार सुबह सब लोग मंदिर गए थे। बताते हैं कि मंदिर से लौटने के बाद दंपती में विवाद शुरू हो गया। क्लेश बढ़ा तो मैकूलाल के स्वभाव से वाकिफ लोग अपने घरों में चले गए।
ताबड़तोड़ करता रहा वार, आत्मग्लानि में लटका
मैकूलाल इस कदर गुस्से में था कि उसने खुरपी के साथ ही दरांती से भी सीमा पर हमला किया। गर्दन पर कई जगह गहरे घाव बन गए थे। पड़ोसियों का तो यह भी कहना है कि जिस तरह सीमा की चीखें गूंज रही थीं, उससे लगा कि मैकूलाल ने ताबड़तोड़ कई वार किए होंगे। थोड़ी देर बाद खामोशी का माहौल होने पर लोग उसके घर की ओर गए तो देखा कि मैकूलाल भी फंदे पर लटका तड़प रहा था। पड़ोसियों के मुताबिक सीमा का शरीर शांत होने पर मैकूलाल ने आत्मग्लानि की वजह से जान दे दी।
अनाथ हुए दो मासूम, अब परवरिश का सवाल
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मैकूलाल की शादी छह साल पहले हुई। उसका पांच साल का बेटा राजीव व तीन साल का बेटा शिवा है। घटना के बाद भी उन्हें अनाथ होने का अहसास नहीं था। छोटा बेटा बार-बार भागकर सीमा के शव की ओर जा रहा था। वह मां को पुकार रहा था तो दादी व अन्य महिलाओं ने उसे समझाया। मैकूलाल के परिवार में तीन भाइयों के पास कुल पांच बीघा जमीन है और कमाई का खास सहारा नहीं है। उसकी ससुरालवालों की माली हालत भी बेहतर नहीं है। इसलिए दोनों मासूमों की परवरिश को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


