Bareilly News: तीन माह में एक कदम भी नहीं बढ़ सकी जाम से निपटने की योजना
बरेली। शहर का व्यस्त इलाकों में बेतरतीब ऑटो, ई-रिक्शा जाम का सबब बन रहे हैं। कलर कोडिंग के आधार पर ऑटो, ई-रिक्शा के संचालन की योजना तीन माह से अटकी हुई है। ऑटो, ई-रिक्शा के लिए शहर में बनाए गए अस्थायी स्टैंडों पर भी कब्जा हो गया है। ज्यादातर स्थानों पर निजी वाहनों की पार्किंग हो रही है। वहीं, चौराहों पर ऑटो व ई-रिक्शा के झुंड समस्या को और बढ़ा रहे हैं। जंक्शन, सेटेलाइट व पुराने बस अड्डे तक जाने वाले रास्तों और प्रमुख चौराहों पर भीषण जाम लग रहा है।
परिवहन विभाग व यातायात पुलिस ने अगस्त के पहले सप्ताह में कलर कोडिंग के आधार पर ऑटो व ई-रिक्शा संचालन की योजना बनाई थी। इसके लिए शहर में 32 स्थानों पर अस्थायी स्टैंड के बोर्ड लगा दिए गए पर इसके बाद योजना परवान नहीं चढ़ सकी। ई-रिक्शा यूनियन के विरोध की वजह से मामला अधर में अटक गया। तीन महीने के बाद भी स्थिति जस की तस है। इस बीच सड़कों पर वाहनों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह त्योहारी सीजन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में लोगों को नियमित रूप से जाम से जूझना पड़ा।
अस्थायी स्टैंडों पर अतिक्रमण
शहर में बनाए गए अस्थायी स्टैंडों पर अतिक्रमण हो गया है। जंक्शन से कहचरी रोड, सेटेलाइट व पुराना बस अड्डा तक स्थिति ज्यादा खराब है। सिकलापुर, कालीबाड़ी मंदिर और श्यामगंज चौकी के पास अस्थायी स्टैंड हैं, लेकिन इनसे अलग मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के सामने सड़क के दोनों ओर और श्यामगंज चौराहा पर ऑटो, ई-रिक्शा के झुंड दिन भर ट्रैफिक को जाम किए रहते हैं।
जिले में 13 हजार ई-रिक्शा, 10 हजार से ज्यादा ऑटो
जिले में 13 हजार ई-रिक्शा और 10 हजार से ज्यादा ऑटो पंजीकृत हैं। इनमें से 75 फीसदी का संचालन शहर में होता है। इनमें भी सबसे ज्यादा ऑटो, ई-रिक्शा जंक्शन से सेटेलाइट और पुराना बस अड्डा के रास्तों पर दौड़ते हैं। गांव-देहात से आने वाले टेंपो की संख्या भी 2500 से ज्यादा है। टेंपो भी बेरोकटोक व्यस्त इलाकों में घुस जाते हैं। इससे जाम की समस्या और भी विकट हो जाती है।



