बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले संभावित जुर्माने पर सीमित शुल्क लगाया जाएगा , ईएमआई अंशदान नहीं कर पाने पर
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ऋण पर दंडात्मक प्रभार: ग्राहकों द्वारा किसी महीने में लोन की ईएमआई का भुगतान नहीं किया जाता है, किसी या एनबीएफसी की ओर से भारी भरकम वसूली पर बैंकिंग सेक्टर के नियामक प्राधिकरण ने नकेल करने का फैसला किया है। कहने वाले द्वारा जाने वाले पेनल्टी चार्ज के रकम पर जिम्मेदार लिमिट तय करने वाला है। इलेक्ट्रॉनिक ने कहा है कि गंभीर या एनबीएफसी द्वारा जाने वाला पेनल्टी कमाई का जरिया नहीं हो सकता है।
जुर्माना नहीं है पेनल्टी चार्ज
मॉनिटरी पॉलिसी का एलान करते हुए आरबीआई प्राधिकारी अधिकारिता दास ने कहा है कि मौजूदा समय में कर्ज का भुगतान नहीं किया जा सकता है और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान की पेनल्टी ली जा सकती है। लेकिन ये लेकर संस्था पेनल्टी लगाने को अलग अलग खाताधारक अपनाती है जिसमें कई बार ये पाया गया है कि ये पेनल्टी चार्ज बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में पेनल्टी पार्टनरशिप के मामले में दायरा बढ़ाना, उसे सीमित करना और उपभोक्ताओं के संरक्षण करने के लिए पेनल्टी चार्ज लगाने को लेकर स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेने के लिए प्राधिकरण दिशानिर्देश जारी करते हैं।
पेनल्टी चार्ज पर कैप लगेगी
अधिकारियों ने कहा कि अब ये तय किया गया है कि कर्ज चुकाने में देरी या चूक होने पर पेनल्टी चार्ज सीमित होने के साथ देयता होगी। और ये ऋण पर ब्याज लेने वाले ब्याज पर जुर्माना ब्याज दर के रूप में नहीं लगाया जा सकता है। पेनल्टी चार्ज अलग से वसूला जाएगा और स्के प्रिसंपल अमाउंट में पेयर नहीं किया जा सकता है।
खत्म होता है – एनबीएफसी की मनमानी
मौजूदा समय में बैंक और एनबीएफसी के पास कर्ज नहीं चुकाया जाता है या कोई मासिक भुगतान नहीं किया जाता है, विलंबित ऋण पर पेनल्टी के रूप में ब्याज वसूलने का अधिकार है। इसका मकसद लेने वालों में ईएमआई के भुगतान में अनुशासन है। लेकिन सामाजिक और अन्य वित्तीय सट्टेबाजों ने व्यक्तिगत रूप से जुर्माना वसूलना शुरू कर दिया जिससे उपभोक्ताओं ने भारी रोष देखा और जिनके ग्राहक रेग्युलेटर से लगातार एक्सचेंज भी कर रहे हैं। जिसके बाद प्राधिकरण ने इसे लेकर नियम बनाने का फैसला किया है।
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