परशुराम जन्मस्थली : विकास के लिए मांगा अतिरिक्त बजट

जलालाबाद स्थित परशुराम मंदिर पर प्रस्तावित कार्य के लिए निरीक्षण करते यूपीपीसीएल के अधिकारी। सं
जलालाबाद। मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत भगवान परशुराम जन्मस्थली पर विभिन्न तरह के निर्माण और सुंदरीकरण कार्य प्रस्तावित हैं। इन्हें मूर्त रूप देने के लिए यूपीपीसीएल ने प्रदेश सरकार से पांच करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की मांग की है।
चार जनवरी को उप्र प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड बरेली के सहायक परियोजना प्रबंधक रामहित पटेल के नेतृत्व में टीम परशुराम मंदिर पहुंची थी। टीम ने सर्वे कर अनुमानित लागत का आकलन किया था। शुक्रवार को यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर तरुण चतुर्वेदी, महाराष्ट्र स्थित नागपुर की कंपनी अमृत ट्रंकीप्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट हुसैन दुर्गवाला के साथ विभागीय टीम यहां पहुंची। अधिकारियों ने फिर से सभी स्थलों का निरीक्षण किया। परशुराम मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों से निर्माण कार्यों को लेकर चर्चा की। बताया कि जरूरत के मुताबिक यहां जो कार्य कराने का एस्टीमेट तैयार किया गया है, उसकी लागत ज्यादा आने से इसके लिए पांच करोड़ की धनराशि और स्वीकृत किए जाने की मांग सरकार से की गई है। इससे पहले क्षेत्रीय पर्यटन विभाग ने विस्तृत सर्वे के बाद 87 करोड़ का बजट शासन को भेजा था। बजट ज्यादा होने के कारण प्रदेश सरकार ने इसे स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया। करीब डेढ़ साल से यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास लंबित है। प्रदेश सरकार ने मंदिर पर जरूरी कार्य पूरे कराने के लिए 15 करोड़ की धनराशि के बजट से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर भेजने के निर्देश यूपीसीसीएल को दिए थे।
ये कार्य प्रस्तावित हैं
पुरानी धर्मशाला को हटाने के बाद उसके क्षेत्र में वृद्धि करके ग्राउंड फ्लोर पर बड़ा हॉल, उसके प्रथम तल को मंदिर से जोड़कर परिक्रमा स्थल को बढ़ाना और उसे पास में ही बने दूसरे हॉल से जोड़ना, द्वितीय तल पर रूम और अन्य निर्माण व तृतीय तल पर सभी व्यवस्थाओं से युक्त पुजारी आवास का निर्माण होना है। इस बहुद्देश्यीय भवन में सीढ़ियों के अलावा लिफ्ट लगना भी प्रस्तावित है। पूरे स्थल में पत्थर और रेलिंग लगाने का कार्य, श्रद्धालुओं के लिए टिन शेड और आसपास की गलियों में नाली, पानी व बिजली की अंडरग्राउंड व्यवस्था, रामताल में जाने वाले गंदे नाले को दूसरी जगह मोड़ने जैसे कार्य प्राथमिकता से किए जाने हैं।