पीलीभीत: दुधवा के बाद पीलीभीत में भूख और गर्मी से तेंदुए की मौत, जंगल से सटे इलाके में मिला शव

पीलीभीत में भूख और गर्मी से तेंदुए की मौत
– फोटो : अमर उजाला
दुधवा में तीन बाघों और एक तेंदुए की मौत बाद अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज से सटे बैजूनगर के एक खेत में तेंदुए का शव मिला है। बरेली के आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) में पोस्टमार्टम से पता चला कि तेंदुए की मौत भूख और गर्मी से हुई है।
मंगलवार सुबह जिस खेत में शव मिला, वह वन सीमा से महज 15 मीटर दूर है। इस खेत के मालिक रामदुलारे का बेटा उमाशंकर वन विभाग में वाचर है। उसी की सूचना पर सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित हैं। शरीर पर चोट भी नहीं मिली। तेंदुए की उम्र एक से डेढ़ साल लग रही है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की टीम की मौजूदगी में पोस्टमार्टम हुआ। आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक डॉ. केपी सिंह के अनुसार तेंदुआ 72 घंटे से भूखा। साथ ही वो हीट स्ट्रोक का शिकार हो गया था। बता दें कि गजरौला इलाके गांव में महुआ के खेत में 25 मई को भी एक तेंदुए का शव मिला था।
निगरानी पर उठे सवाल
टाइगर रिजर्व के जंगल और उसके बाहर निकलने वाले वन्य जीवों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर दावे खोखले साबित हो रहे हैं। महज 19 दिन में दूसरे तेंदुए का शव मिलने से यह बात साफ हो गई है। तेंदुओं की मौत क्यों हो रही है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, इसलिए भी लापरवाही ज्यादा है। यहां बता दें कि इससे पहले 25 मई को शव मिला था।
जंगल या जंगल से बाहर कुछ भी हो महज निगरानी की बात कहकर टाल दिया जाता है। मंगलवार को गजरौला क्षेत्र में जंगल से महज 15 मीटर के दायरे में खाली खेत में तेंदुए का शव मिलने से सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में करीब 65 बाघ और 100 से अधिक तेंदुए हैं। लगातार बढ़ रही संख्या के बाद जंगल और उसके बाहर के इलाके में हिंसक वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। पीटीआर के बाहर अमरिया, न्यूरिया और गजरौला क्षेत्र में आए दिन बाघ और तेंदुओं की चहलकदमी देखी जा सकती है।