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खींच के बाद अब यूनिकॉर्न प्राधिकरण ने कर्मचारियों को दिया यह तगड़ा झटका! लिया यह बड़ा फैसला

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भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों ने मूल्यांकन में कटौती की: वैश्विक मंदी के आसार के बीच कई भारतीय यूनिकॉर्न दौड़ (यूनिकॉर्न स्टार्टअप) कंपनियों ने कर्मचारियों को तगड़ा झटका दिया है। साल 2023 की शुरुआत के साथ ही विभिन्न कंपनियां फंडिंग (Startup Funding Winter) की कमी से जूझ रही है। ऐसे में अपने खर्च में कटौती करने के लिए इन संस्थाओं ने बड़ा फैसला किया है। दिनभर की 100 से अधिक यूनिकॉर्न मेज़र अपने अप्रेजल बजट 2023 में भारी (स्टार्टअप कंपनियों के मूल्यांकन बजट) का चयन करती है। ऐसे में कर्मचारियों को खींचने के बाद अप्रेजल में भी कमी का सामना करना पड़ेगा।

10 से 3 यूनिकॉर्न ने जीरो अपरेजल बजट रखा

मनीकंट्रोल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 10 में लगभग 3 यूनिकॉर्न ने वेतन के लिहाज से न्यूनतम से लेकर शून्य बजट रखा है। वहीं साल 2022 की बात तो अप्रेजल बजट कुल सैलरी का 12.1 फीसदी था जो अब गिरकर 7.7 फीसदी तक पहुंच गया है। ऐसे में प्राधिकरण ने अपने कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के बजट में पिछले साल के लिए भारी आवंटन किया है। ज्यादातर ऑब्जर्व या तो अपने अप्रेजल को 2 से 3 महीने की देरी से दे दिया है या इसे देने का फैसला नहीं किया है।

बड़ी कंपनियां भी कर रही हैं वेतन में कटौती

ध्यान देने वाली बात ये है कि यह चयन केवल धीरतावादी तक ही सीमित नहीं है। पांच दिग्गज भारतीय अरबपतियों ने भी न्यूनतम से लेकर शून्य अप्रेजल देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद कर्मचारियों की सैलरी की औसत वृद्धि दर वर्ष 2022 में 12.4 प्रतिशत के मुकाबले केवल 8.2 प्रतिशत रह गई है। कोरोना काल में आरोपित ने जरूरत से ज्यादा हायरिंग कर ली थी। इसके बाद वैश्विक मंदी की आहट के कारण कई शेयरों ने जोखिम में निवेश से हाथ पीछे खींचने के लिए। इसके कारण सघन फंडिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 में कई रेज़िस्टेंट ने यह बताते हुए 25,000 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है।

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