खादी और उससे जुड़े उत्पादों की भारी मांग, 2022-23 में 1,34,623 करोड़ रुपये की बिक्री हुई
खादी इंडिया रिकॉर्ड बिक्री: हाल के वर्षों में खादी से जुड़े प्रोडक्ट्स की जबरदस्ती मांगें रोजगार देने वाले मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद। यही नतीजा है कि पिछले नौ वर्षों में पिछले 9 वित्त वर्षों में ग्रामीण क्षेत्र के कारीगरों द्वारा बनाए गए स्वदेशी खादी उत्पादों की बिक्री में 332 फीसदी की जबरदस्त लुकिंग देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का कारोबार 31154 करोड़ रुपये का हुआ था वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़ा 1,34,630 करोड़ रुपये के स्तर पर जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद के खादी और उससे जुड़े उत्पादों के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं। खादी को बढ़ावा देने की लगातार शिकायत करते रहे हैं। जिसका नतीजा है कि पहली बार केवीआईसी (केवीआईसी) के उत्पादों का कारोबार 1.34 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र में केवीआईसी ने 9,54,899 नए रोजगार का सृजन भी किया है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश और विदेश में हर मंच से खादी का प्रचार-प्रसार किया है, जिससे आज खादी की लोकप्रियता के नए शिखर पर पहुंच गया है। आज खादी उत्पादों की गिनती विश्व के सबसे विश्वसनीय दावों में होती है। वित्त वर्ष 2013-14 से 2022-23 में खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों के उत्पादन में जहां 268 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं बिक्री ने कई रिकॉर्ड तोड़ते हुए 332 प्रतिशत के आंकड़े छू लिए हैं। ऐसा लगता है कि मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी उत्पादों पर देश की जनता की जिम्मेदारी बढ़ी है।
वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योगी उत्पादों का उत्पादन जहां 26,109 करोड़ रुपये था वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में यह 268 प्रतिशत के उछाल के साथ 95957 करोड़ रुपए पहुंच गया। पिछले 9 वर्षों में कपड़ों के कपड़ों के उत्पादन में भी विषम बदलाव देखने को मिले हैं। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां खादी कपड़ों का उत्पादन 811 करोड़ रुपये था वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में 260 प्रतिशत के उछाल के साथ 2916 करोड़ रुपये के आंकड़े पहुंचे, जो कि अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
खादी के कपड़ों की मांग से भी जानकारी मिलती है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां इसकी बिक्री महज 1081 करोड़ रुपये थी, वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में 450 प्रतिशत के साथ 5943 करोड़ रुपये पहुंच गई। COVID-19 के बाद पूरी दुनिया में सजीव कपड़ों की मांग की जा रही है। इसके कारण कपड़ों के कपड़ों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
खादी के शहरी क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, उनमें भी सफलता मिली है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां 5,62,521 नए रोजगार लिखे गए वहीं वित्त वर्ष 2022-23 में यह 70 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9,54,899 तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2013-14 से अब तक कुछ पारिश्रमिक में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। हाल ही में, 1 अप्रैल, 2023 को पादरी कारीगरों के खादी में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
2 अक्टूबर 2022 को नई दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित केवीआईसी के झंडे वाले भवन की बिक्री ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। पीएम मोदी की अपील पर खादी को पसंद करने वालों ने एक दिन में पहली बार 1.34 करोड़ रुपए की खादी और ग्रामोद्योगी उत्पाद खरीदे कर नया कीर्तिमान बनाया।
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