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Bareilly News: बरेली कॉलेज के सचिव व उपाध्यक्ष गबन और धोखाधड़ी के आरोपी

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बरेली। बरेली कालेज के टेंडर मामले में प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति व उपाध्यक्ष काजी अलीमउद्दीन पर धोखाधड़ी के अलावा गबन के भी आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट में दाखिल पांच सौ से अधिक पेजों की केस डायरी में पुलिस ने सचिव पर एक ही टेंडर पर परीक्षा भवन, सीसी रोड, टीन शेड बनवाने और इसका ठेका चहेते ठेकेदार को देने का आरोप लगाया है।

विवेचना में कहा गया कि प्रबंध समिति ने वर्ष 2016 से 2020 तक भवन निर्माण में नियमों का पालन नहीं किया। परीक्षा भवन का ग्राउंड फ्लोर बनवाने के लिए टेंडर निकाला, लेकिन उसी टेंडर पर उसी दर पर प्रथम तल, द्वितीय तल का निर्माण कराकर भुगतान कर दिया। इसी तरह सीसी रोड का टेंडर निकाला गया। उसी एक टेंडर से अन्य सड़कों का निर्माण करा दिया गया। कर्मचारी आवास बनवाने का टेंडर एक बार आमंत्रित किया और उस पर बार बार कर्मचारी आवास बनवाए गए। उनका भुगतान किया गया।

मनमाने तरीके से परीक्षा भवन पार्ट ए, बी, सी , सीसी रोड व टिन शेड आदि की बिड नहीं खोली गई। इस निर्माण के मानक पूरे न होने के बावजूद टेंडर खोले गए। प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति व उपाध्यक्ष काजी अलीमउद्दीन ने अपने चहेते ठेकेदार को 6.17 करोड़ का भुगतान कर दिया। इस काम की जांच किसी भी सरकारी विभाग से नहीं कराई। पीडब्ल्यूडी की जांच में इसकी पुष्टि हुई।

इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय एक और कमेटी गठित की गई। इसमें क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी राजेश प्रकाश, माध्यमिक शिक्षा के तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी राम कुमार मौर्य, वित्त लेखाधिकारी परशुराम औझा, वरिष्ठ लेखा परीक्षक अमर सिंह के अलावा बेसिक शिक्षा अधिकारी मोहसिन खां भी शामिल थे। समिति ने कालेज के निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितताएं पाईं। बाद में रिपोर्ट लिखाई गई, लेकिन किसी को नामजद नहीं किया गया।

बाद में प्रबंध समिति के सचिव देव मूर्ति, काजी अलीमउद्दीन, ठेकेदार मकसूद खां व आर्किटेक्ट योगेंद्र शर्मा के अलावा प्राचार्य सोमेश यादव व अजय कुमार शर्मा को भी आरोपी माना। विवेचना में आगे चलकर दोनों प्राचार्यों को क्लीन चिट दे दी गई। सचिव देव मूर्ति, काजी अलीमउद्दीन, मकसूद खां व योगेंद्र शर्मा को पुलिस ने धोखाधडी करने का दोषी माना। इसी धारा में चार्जशीट लगाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन तत्कालीन सीओ ने 11 अप्रैल 23 को इस मामले में कुछ और बिंदुओं पर जांच करने के लिए कहा।

इसके बाद विवेचक राजवीर सिंह ने देव मूर्ति व काजी अलीमउद्दीन को लोक सेवक मानते हुए उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 409 में आरोप पत्र दाखिल किया। ठेकेदार मकसूद खां व आर्किटेक्ट योगेंद्र शर्मा के खिलाफ सिर्फ धारा 420 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।


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