Bareilly News: डेढ़ सौ रुपये की खातिर बरात में आए थे बाल श्रमिक
नवाबगंज। बैंड में करंट उतरने से जिन बाल श्रमिकों की जान गई, वे महज डेढ़ सौ रुपये मजदूरी की खातिर बैंड मालिक के साथ आए थे। घटना के बाद मौके पर भगदड़ मची तो बैंड मालिक भी खिसक गया। घटना को लेकर लोगों में गुस्सा था।
हाफिजगंज कस्बे से पांच किमी दूर पीलीभीत रोड पर स्थित गांव राजघाट के बगल में ही औरंगाबाद बड़ा गांव है। शहनाज बैंड के मालिक इकरार अहमद ने राजघाट में दुकान खोल रखी है, जहां से बुकिंग की जाती है। बैंड में काम करने वाले लड़के औरंगाबाद के ही हैं। एक बरात में 10-15 लड़के जाते हैं। इनमें से कुछ लाइट उठाते हैं तो कई जनरेटर खींचते हैं। बैंड की गाड़ी में बैठकर ही इन्हें वापस लौटना था। इनके खाने की जिम्मेदारी भी बैंड मालिक की थी।
लड़के बेफिक्र होकर लाइटें उठाए चल रहे थे, तभी तारों में चिंगारी के साथ करंट एक से दूसरे को लगता चला गया। जो बैंड के ज्यादा पास थे, उन्हें जोर का झटका लगा और धड़ाम से वहीं गिर गए। इनमें दोनों सचिन और बग्घी चालक नन्हेलाल शामिल थे। बाकी लोगों को उतना तेज करंट नहीं लगा, हालांकि वे भी चीखते हुए गिरे और हाथ-पैर पटकने लगे। कुछ लोगों ने समझदारी दिखाते हुए लकड़ी से तारों को हटाकर लड़कों को उठाया। एंबुलेंस से उनको अस्पताल भेजा गया। वहां दो किशोरों की मौत हो गई। बताया जाता है कि दो और लड़कों का पता नहीं चल रहा है।
सचिन की मां पीटती रहीं छाती
सूचना पर किशोरों के परिजन नवाबगंज सीएचसी पहुंच गए। यहां सचिन का शव मोचर्री में रखा था। वहां उसकी मां सरोज गश खाकर बेहोश हो गईं। वह छाती पीटते हुए कह रही थीं कि उन्हें नहीं पता था कि बेटे को दोबारा जिंदा नहीं देख पाएंगी।
महीने में डेढ़ हजार रुपये तक कमा लेते थे लड़के
सचिन के भाई दिनेश, अनिल और रवि भी नवाबगंज सीएचसी आ गए थे। दिनेश ने बताया कि पिता के पास कोई जमीन नहीं है। पूरा परिवार मजदूरी करके ही पेट पालता है। सचिन बैंड के साथ जाने लगा था। इनाम आदि मिलाकर वह एक बरात में डेढ़ से दो सौ रुपये तक कमा लेता था। सहालग के मुताबिक महीने में डेढ़ हजार रुपये तक कमा लेता था।
पवन की हालत में सुधार
सीओ नवाबगंज चमन सिंह चावड़ा ने बताया कि पवन को बरेली रेफर करने जा रहे थे पर यहीं एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। उसकी हालत में कुछ सुधार है। अनिल और सनी बरेली भेजे गए हैं।
सन्नाटे के बीच हुई रस्में
दो मौतों के बाद समारोह में भी मातम पसर गया। बराती जनवासे की ओर चले गए। खास लोगों के साथ दूल्हा ही दुल्हन के घर तक पहुंचा। वहां बिना ढोलक की थाप या किसी संगीत के विवाह की रस्में हुईं। दुल्हन के पिता रामपाल ने बताया कि कि सुबह जल्दी ही विदाई कर दी जाएगी।



