Bareilly News: जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स खत्म, ब्लड बैंक के चक्कर लगा रहे तीमारदार
बरेली। बेकाबू हो रहे डेंगू से बढ़ रही मरीजों की संख्या ने ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग बढ़ा दी। जिला अस्पताल ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स खत्म हैं। तीमारदारों को रक्तदाता साथ लाने का सुझाव दिया जा रहा है। उधर, आईएमए ब्लड बैंक में भी प्लेटलेट्स के लिए तीमारदारों की कतार लग रही है।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक माहभर पहले चार से पांच यूनिट प्लेटलेट्स की मांग थी, जो अब बढ़कर दो दर्जन से ज्यादा हो गई है। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीज भर्ती हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स मुहैया कराई जा रही हैं। अन्य अस्पतालों में भर्ती मरीजों के तीमारदार को रक्तदाता साथ लाने के लिए कहा जा रहा है। बताया कि प्लेटलेट्स चार से पांच दिन ही सुरक्षित रहता है। आईएमए ब्लड बैंक डायरेक्टर डॉ. अंजू उप्पल के मुताबिक पहले 50-60 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग थी, जो अब डेढ़ सौ से अधिक पहुंच रही है।
बताया कि डेंगू के मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत इसलिए पड़ती है, क्योंकि डेंगू का वाहक एडीज मच्छर मांसपेशियों के बजाय रक्त कोशिका पर हमला करता है। संक्रमण तेजी से फैलने पर खून से पानी अलग होने लगता है। इसलिए अतिरिक्त प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है।
संदिग्ध मरीजों को भी चढ़ा रहे प्लेटलेट्स
सरकारी अस्पताल समेत मेडिकल कॉलेज, निजी अस्पताल, निजी लैब की जांच में अब तक 321 डेंगू मरीज मिले हैं। जाहिर है कि इनके लिए हर दिन 200 यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत नहीं पड़ती। बताते हैं कि कई निजी अस्पताल संदिग्ध मरीजों को भी डेंगू का मरीज बताकर इलाज के नाम पर बिल बना रहे हैं। प्लेटलेट्स की संख्या एक लाख से कम होने पर हालत गंभीर बताकर प्लेटलेट्स की मांग कर रहे हैं।
दस हजार से कम होने पर पड़ती है जरूरत
शरीर में प्लेटलेट्स की कमी को थ्रोबोसाइटोपेनिया कहते हैं। संख्या 10,000 से कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। अन्यथा आंतरिक या बाहरी ब्लीडिंग की आशंका होती है। दर्द निवारक दवा, शराब पीने, आनुवंशिक रोग, कीमोथेरेपी, डेंगू, टाइफाइड, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार, हेपेटाइटिस सी, बैक्टीरियल ब्लड इंफेक्शन, एनीमिया, ऑटोइम्यून रोग होने से प्लेटलेट्स गिरती हैं।
क्या हैं प्लेटलेट्स
एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 5 से 6 लीटर खून होता है, जो लाल और सफेद रक्त कोशिका समेत अन्य तत्वों से मिलकर बनता है। इनमें प्लेटलेट्स भी शामिल हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के एक वर्ग मिलीलीटर रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या डेढ़ से चार लाख तक होती है, जो चोट लगने पर खून के जमने की प्रक्रिया को तेज कर ब्लीडिंग को रोकती हैं। ये बोनमैरो में भी कोशिका के काफी छोटे कण होते हैं।



