Bareilly News: बिजली बिल माफ फिर भी काटे जा रहे नलकूपों के कनेक्शन, अभियंता बोले- नहीं मिला आदेश
बरेली। शासन ने एक अप्रैल से नलकूपों का बिजली बिल माफ कर दिया है। इसके बाद भी बकायेदारी में कनेक्शन काटे जा रहे हैं। आगरा, बरेली व अलीगढ़ मंडल के 12 जिलों से आए किसानों ने बृहस्पतिवार को भारतीय पशुचिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान के सभागार में आयोजित रबी गोष्ठी में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के समक्ष यह मामला उठाया। किसानों ने यह भी कहा कि अभियंता कहते हैं कि इस संबंध में उनके पास लिखित आदेश नहीं आया है।
कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता रणविजय सिंह को मंच पर तलब कर लिया। मुख्य अभियंता सफाई दे रहे थे तभी नवाबगंज के ग्रेम गांव से आए किसान शिवदयाल बोल पड़े। कहा कि एक अप्रैल के बाद का बिल भी जुड़कर आ रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि वह लखनऊ जाकर आदेश नहीं जारी होने के मुद्दे को देखेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा का पालन सभी अभियंताओं को करना है।
पराली प्रबंधन के लिए बरेली की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की पहल पर विकसित एप की तर्ज पर कृषि विभाग पूरे प्रदेश के लिए एप विकसित करेगा। कृषि सचिव राजशेखर ने आगरा के मुकाबले बरेली व अलीगढ़ मंडल में फसली ऋण कम वितरित होने पर सवाल उठाया। विशेष सचिव रेशम सुनील कुमार वर्मा, निदेशक उद्यान अतुल सिंह ने भी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। इससे पहले कृषि मंत्री के विशेष आग्रह पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने गोष्ठी का शुभारंभ किया। संचालन उपनिदेशक कृषि अभिनंदन सिंह ने किया।
आगरा से आईं शिल्पी ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि अपना नलकूप लगवाएं। पड़ोसी के नलकूप से सिंचाई होती है। जब सरकार ने बिल माफ कर दिया तो पड़ोसी क्यों पानी बेच रहे हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पानी बेचा जा सकता है या नहीं, इस पर शासन विचार करेगा।
पीलीभीत के किसानों ने जिला उद्यान अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
नवाबगंज के किसान सर्वेश कुमार लैब के अभाव में उत्पादों को बाजार नहीं मिल पाने का मुद्दा उठाया। इस पर कृषि सचिव ने बताया कि जैविक उत्पादों की जांच और प्रमाणीकरण के लिए प्रदेश में सबसे पहले झांसी और बांदा में प्रयोगशाला स्थापित होगी। आगरा मंडल में मूंगफली के लिए सरकारी क्रय केंद्र खुलेंगे।
साहब मैं सीताराम… छुट्टा पशु खा रहे फसल, कैसे हो आमदनी दोगुनी
कृषि मंत्री के समक्ष बरेली के शाहपुर डांडी निवासी किसान सीताराम उठ खड़े हुए। बोले- साहब मैं सीताराम… छुट्टा पशु छह बार से फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। आमदनी दोगुनी होने की बात छोड़िए, लागत नहीं निकल पा रही है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने उनको शांत कराने की कोशिश की पर कृषि मंत्री ने मंच पर बुलाकर उनकी बात सुनीं। मंत्री ने कहा कि सरकार गो आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ा रही है। मगर असली समाधान तभी होगा, जब किसान खुद अपने पशुओं को अपने घर रखना शुरू कर दें। राकेश गंगवार ने जमीन में घुल रहे जहर और जैविक उत्पादों को बाजार नहीं मिल पाने का मु्द्दा उठाया। फिरोजाबाद के बिजेंद्र सिंह ने टेल तक पानी न आने, मथुरा के अशोक कुमार शर्मा ने आगरा कैनाल में जहरीला पानी आने का मुद्दा उठाया।
किसानों ने साझा की सफलता की कहानी
बरेली के किसान अनिल साहनी की अंगूर की खेती की लघु फिल्म दिखाई गई। आंवला के डॉ. संजय सक्सेना ने मोटा अनाज, नरेश चंद्र गंगवार ने मशरूम की खेती के अनुभव साझा किए। आगरा के सौरभ शर्मा ने एफपीओ से जुड़ी जानकारी दी।
बकाया गन्ना मूल्य का मुद्दा भी गूंजागन्ना मूल्य के बकाया का मुद्दा गूंजा तो कृषि मंत्री ने अफसरों को तलब कर लिया। अधिकारियों ने 15 दिसंबर तक बकाया भुगतान कराने की बात कही।
मंत्री बोले- पहले की सरकार में खाद के लिए लगती थी कतार, किसान ने कहा, अब भी लग रही
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अखिलेश सरकार में खाद के लिए कतार लगती थी और लाठियां पड़ती थीं। हमारी सरकार में सब कुछ बदल रहा है। इसी बीच एक किसान बोल पड़ा- साहब कतार तो अब भी लग रही है। इस पर मंत्री ने पाला बदला। बोले- हम यह नहीं कहते कि सब कुछ ठीक हो गया, लेकिन हम उसे ठीक करने के रास्ते पर हैं। किसानों से सवाल किया- क्या कोई कृषि मंत्री रबी गोष्ठी में आता था। किसानों ने जवाब दिया- नहीं। मंत्री बोले- यही अंतर है हमारी और उनकी कार्यप्रणाली में।
गोष्ठी में दी गईं प्रमुख जानकारियां
– जनवरी के द्वितीय सप्ताह में गो-आधारित खेती के लिए लखनऊ में कार्यशाला होगी।
– कृषि विभाग तीन महीने में एक ऐसा पोर्टल लांच करेगा, जिसमें खेती में नए प्रयोग कर रहे किसानों की कहानियां होंगी।
– 15 दिसंबर तक बीज का अनुदान किसानों के खाते में पहुंच जाएगा।
– फसल बीमा क्लेम के सभी प्रकरण जल्द निस्तारित कराए जाएंगे।
– सम्मान निधि के लिए किसानों की केवाईसी कराएंगे।



