Rampur News: 14 मामलों में आजम परिवार ने तुड़वाई जमानत
रामपुर। जेल में सात साल की सजा काट रहे सपा नेता आजम खां, उनकी पत्नी डाॅ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम ने कुल 14 मामलों में जमानत को तुड़वा लिया है। कोर्ट ने उनके जमानतियों को जमानत के दायित्व से मुक्त करते हुए तीनों आरोपियों को अभिरक्षा में लेने के आदेश कर दिए हैं। सपा नेता आजम खां अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में दोषी करार दिए गए थे। कोर्ट आजम, अब्दुल्ला और उनकी डाॅ. तजीन फात्मा को सात-सात साल की कैद व पचास हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुना चुकी है। सपा नेता आजम खां सीतापुर, अब्दुल्ला हरदोई जबकि तजीन फात्मा रामपुर जेल में बंद हैं। 18 अक्तूबर से जेल में बंद सपा नेता आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम ने बृहस्पतिवार को 14 मामलों में अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत को तुड़वाने का प्रार्थना पत्र दिया,जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उनके जमानतियों को जमानत के दायित्व से मुक्त कर दिया।
साथ ही कोर्ट ने धारा 309 के तहत वारंट तैयार कराते हुए उनको न्यायिक अभिरक्षा में लेने के आदेश कर दिए हैं। इस आदेश के बाद अब उनको इन मामलों में नए सिरे से जमानत लेनी होगी। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने बताया कि आजम खां के अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए जमानतियों को जमानत के दायित्व से मुक्त कर दिया।
इन मामलों में तुड़वाई जमानत
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने बताया कि किसानों की जमीनों से जुड़े पांच मामलों के अलावा टांडा, गंज, बिलासपुर, शाहबाद थाने में दर्ज मामलों में जमानत तुड़वाई गई है। कुल मिलाकर 14 मामले हैं। अधिकतर मामलों में आजम खां ही आरोपी हैं। कुछ मामलों में अब्दुल्ला और तजीन फात्मा भी आरोपी हैं।
जमानत तुड़वाने की ये है प्रक्रिया
यदि किसी आरोपी की जमानत मंजूर हो चुकी हो और वो जमानत तुड़वाना चाहता है तो अपने अधिवक्ता के जरिये अदालत में एक प्रार्थना पत्र देता है। इसके बाद अदालत संबंधित आरोपी से जमानत तुड़वाने की वजह पूछती है और संतुष्ट होने पर कोर्ट उनके प्रार्थना पत्र को मंजूरी देती है। फिर उसके बाद जमानतियों को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया जाता है। अदालत आरोपी के खिलाफ धारा 309 का वारंट बनाकर उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेने का आदेश देती है। उसके बाद पुलिस उसे न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया जाता है और उसे दोबारा जमानत लेनी पड़ती है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई आजम की पेशी, तय नहीं हुए आरोप
नफरती भाषण के मामले में दिया गया स्थगन पत्र
रामपुर। लोकसभा चुनाव के दौरान नफरती भाषण देने के मामले में आरोपी सपा नेता आजम खां पर बृहस्पतिवार को आरोप तय नहीं हो सके। आजम खां की सीतापुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेशी हुई। सुनवाई के दौरान आजम के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया। कोर्ट ने प्रार्थनापत्र स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तारीख तय की गई। इसके चलते उन पर आरोप तय नहीं हो सके।
यह मामला लोकसभा चुनाव 2019 का है। लोकसभा चुनाव में सपा नेता आजम खां ने जनसभा के दौरान नफरती भाषण दिया था, जिस पर भोट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। बृहस्पतिवार को इस मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान आजम खां के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में स्थगन प्रार्थना पत्र दिया। इसके चलते आजम पर आरोप तय नहीं हो सके।
डूंगरपुर प्रकरण के तीन मामलों में आठ को सुनवाई
रामपुर। सपा नेता आजम खां पर दर्ज डूंगरपुर के तीन मामलों में बृहस्पतिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले की सुनवाई अब आठ दिसंबर को होगी। गंज थाना क्षेत्र में डूंगरपुर बस्ती को खाली कराए जाने के मामले दर्ज कराए गए थे। यह सभी मामले कोर्ट में विचाराधीन है। एडीजीसी सीमा राणा ने बताया कि अब इन मामलों की सुनवाई आठ दिसंबर को होगी। संवाद