Bareilly News: जिन बाबुओं ने जनता को चूना लगाया, उनका रुपया गोला ने पचाया
बरेली। प्रशासन और दूसरे सरकारी विभागों में मलाईदार पटल पर तैनात कई बाबू बिना चढ़ावा जनता का काम नहीं करते। ऐसे लोगों की काली कमाई पांच साल में दोगुनी कराने के नाम पर गोला बंधुओं ने अपनी आईसीएल कंपनी में निवेश करा ली। अब यह लोग बिना शिकायत किए ही अपनी रकम वापसी का जुगाड़ लगा रहे हैं।
आईसीएल में लगी रकम को पाने के लिए ऐसे लोगों ने पहले तो गोला बंधुओं पर दबाव बनाया, लेकिन उन पर कार्रवाई होने के बाद अब सरकारी बाबू डूबी रकम बचाने का जुगाड़ लगा रहे हैं। सरकारी विभागों में तैनात बाबुओं के पास काली कमाई को छुपाने और कंपनी में निवेश करने जैसा बहुत आसान रास्ता था। अब गोला बंधुओं का ठगी का मायाजाल सामने आने के बाद ये लोग परेशान हो रहे हैं। चर्चा है कि कुछ विभागों में बाबुओं के कहने पर कनिष्ठ अफसरों ने भी परिवार के लोगों के नाम से निवेश कर रखा था। अब ये अफसर और बाबू अपनी रकम वापस तो चाह रहे हैं, लेकिन शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। कई अफसर और बाबू अपने कार्यालयों में आने वाले पत्रकारों से इस बात की चर्चा छेड़कर माहौल पता करने की कोशिश कर रहे हैं। वे ये भी कहते सुने गए हैं कि रकम वापसी का कोई जुगाड़ हो तो जरूर बताना।
ठगी के शिकार ये लोग कंपनी के लोगों से संपर्क करके भी अपनी रकम बचाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। कई लोगों को कंपनी की तरफ से प्लॉट देने का झांसा दिया गया था, लेकिन उनकी पॉलिसी का समय पूरा होने पर कंपनी ने न तो रकम लौटाई और न ही प्लॉट दिया। कंपनी में जिन लोगों की काली कमाई लगी थी, उन्हें कंपनी के लोग अब भी रकम लौटाने का वादा कर रहे हैं। करोड़ों की रकम कहां से लौटाएंगे, इसका जवाब उनके पास भी नहीं है। फिलहाल पुलिस एके गोला और कंपनी के अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
वकीलों को भी लगाया चूना, बोले-हाईकोर्ट तक जाएंगे
महाठग गोला के झांसे के शिकार कई वकील भी हुए हैं। बीते दिनों कुछ वकीलों ने प्रेमनगर थाने में जाकर इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। बताया कि उन लोगों की मेहनत की कमाई भी गोला बंधुओं ने निवेश करा रखी थी। उनके जेल जाने के बाद से रकम वापस मिलने को लेकर संशय है। इंस्पेक्टर के मुताबिक, वकीलों ने कहा कि वह अपने लोगों से हुई ठगी की संयुक्त तहरीर देंगे। साथ ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करेंगे ताकि गोला व उसके साथी अग्रिम जमानत या किसी तरह की कानूनी राहत न पा सकें।



