Bareilly News: हिंदी सबसे सरस, सशक्त और संवेदनशील
बरेली। भाषा…अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। कहावत है कि जब बात दूर तक पहुंचानी हो तो लोगों को भाषा में कही जानी चाहिए। आज हम आपको ऐसे युवाओं से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने अपने लिखे ब्लॉग्स और कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए हिंदी को माध्यम बनाया और लोकप्रियता हासिल की। इन्होंने पढ़ाई भले ही अंग्रेजी माध्यम से की लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहे। हिंदी को ही रचनात्मकता का माध्यम बनाया। युवाओं का कहना है कि जब हम मां से दाल-चावल अंग्रेजी में नहीं मांग सकते तो दूसरी किसी भाषा का हाथ थामने का क्या मतलब है।
अंग्रेजी माध्यम से पढ़े, अब हिंदी कविताओं का संग्रह होगा सामने
हिंदी एक भाषा होने के साथ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण कड़ी भी है। हिंदी में एक अलग ही अपनापन और भाषात्मक सौंदर्य है। मैंने बरेली के सेंट मारिया गोरेट्टी इंटर कॉलेज से पढ़ाई की है और इस इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कर रही हूं। मातृभाषा होने के कारण हिंदी मुझे बेहद प्रिय है। बचपन से ही मैं हिंदी में कविताएं लिखना बहुत पसंद करती हूं। जल्द ही अपनी 50 कविताओं का संग्रह प्रकाशित कराना चाहती हूं, जिसमें ””चिराग””, ””मैं नदी हूं”” व ””मैं नारी हूं”” जैसी कविताएं प्रमुख हैं। साथ ही मुझे ब्लॉग लिखने का भी काफी शौक है। – अदिति शुक्ला
अंग्रेजी में लिखने का मन बनाया पर दिल ने गवाही नहीं दी
हिंदी मुझे विरासत में मिली है। भले ही युवा अंग्रेजी की ओर आकर्षित हो रहे हैं लेकिन हिंदी से उनका खून का रिश्ता है। मां और परिवार से बात करने का आनंद हिंदी में ही है। जब ब्लॉग्स लिखना शुरू किया तो पहले सोचा अंग्रेजी में ही लिखते हैं। कुछ लिखा भी, फिर हटा लिया। सोचा जब दिन-रात, सुबह-दाेपहर-शाम हिंदी के बीच गुजर रही है तो लिखना अंग्रेजी में क्यों। काफी समय से साहित्य से जुड़ाव रहा, इसीलिए मैंने इसी भाषा में कॅरिअर तलाशने का मन बनाया। हिंदी से पढ़ाई पूरी करके शोध कर रही हूं। जब मेरे ब्लॉग्स पसंद किए जाते हैं तो अच्छा लगता है। – आयुषी
अंग्रेजी पढ़ने में मजा आया, लिखने में नहीं
घर वालों ने पढ़ाई भले ही अंग्रेजी माध्यम में कराई लेकिन प्यार हमेशा हिंदी से ही रहा। लंबे समय से ब्लॉग्स और कविताएं लिख रही हूं। पहले प्रयास किया कि अंग्रेजी भाषा में भी लिखूं, पर वो मजा नहीं आया। मैं युवाओं के बीच चर्चित मुद्दों पर ही लिखना पसंद करती हूं। अंग्रेजी में लिखा तो लोगों को भी कुछ खास रास नहीं आया। हिंदी में लिखने पर हर वर्ग उससे जुड़ा और सबका काफी प्यार मिला। फिर मैंने दोबारा अपनी भाषा का हाथ नहीं छोड़ा। इस भाषा में अपनापन है। – अवनी भारद्वाज
बचपन से ही कविताओं में डूबी रहीं काम्या
अगर आपमें कोई रचनात्मकता है तो उसे अपनी भाषा में व्यक्त करें। इससे उसे ज्यादा लोकप्रियता मिलेगी। मैंने बचपन से ही खुद को हिंदी साहित्य के करीब पाया। सात वर्ष की अवस्था में अपनी पहली कविता लिखी। पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे, इसलिए विज्ञान विषय से स्नातक किया पर कापियों के पीछे कविताएं व लेख स्वयं ही जन्म ले रहे थे। पापा ने इस बात को समझा और मैंने परास्नातक हिंदी विषय से किया। हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में मेरी कुछ कविताएं प्रकाशित हुई हैं। इसके अलावा ब्लॉग भी लिखती हूं। – काम्या भारद्वाज
फाेटो
खड़ी बोली में खो रही देसी शब्दों की मिठास
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। रुहेलखंड क्षेत्र की भाषा काफी सरस व समृद्ध रही है। यहां प्रचलित मसेरी, बुढ़ारना, बरौठो, गोढां और लवारे जैसे तमाम शब्दों की मिठास अब खड़ी बोली के प्रभाव से खत्म हो रही है। हैं। जिन युवाओं का देहात से कोई जुड़ाव नहीं है, वह इन शब्दों से बिल्कुल अनभिज्ञ हैं। बरेली कॉलेज में हिंदी की प्रोफेसर डॉ. निरुपमा शर्मा ने बताया कि पहचान खो रही स्थानीय भाषा पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती, इस वजह से भी नई पीढ़ी देसी शब्दों से अनिभज्ञ है। छात्र- छात्राएं सत्र, वर्ग, अनुच्छेद, परिच्छेद, बिंदु, विश्लेषण, समीक्षा, विवेचना, आलोचना आदि शब्दों के अर्थ व प्रयोग से अनभिज्ञ हैं।
रुहेलखंड क्षेत्र के प्रचलित शब्द
शब्द अर्थ
बिजना- पंखा
पौढ़ी – लेटना
गरौंधी- गाय के गले में बांधने वाली रस्सी
बढ़नी- झाड़ू
बुढ़ारना – सफाई करना
हरवा- हार
डंगर – मवेशी
मेओ-पानी बरसना
लढि़या – बोझ ढोने वाली गाड़ी
रब्बा – छोटी बैल गाड़ी
देहरी- दहलीज
तखरी- तराजू
पंगत- दावत
बरौठो- गैलरी
महिगओ- रस्सी
कंडा- गोबर का उपला
बखारी- भंडार घर
डेहरिया – गेहूं रखने की कुठिया
डोलची- दूध रखने के लिए बाल्टीनुमा पात्र
बटुईया- खाना पकाने का बर्तन
चौपार- बैठक
गोढां- घर के बाहर जानवर बांधने का स्थान
बखरी- मकान
मसेरी- बेडनुमा चारपाई
उखारी- गन्ने का खेत
सलूका- रुई का बना स्वेटरनुमा वस्त्र
लवारे- भैंस का छोटा बच्चा
बिछौना- आसन
सामान्य बीमारियों से जुड़े 102 लेख हिंदी में लिखे
डॉ. शरद अग्रवाल ने सामान्य बीमारियों से जुड़े 102 लेख हिंदी में लिख दिए। इसके बाद उन्हें अपनी वेबसाइट www.healthhindi.in पर अपलोड कर दिया। इसके साथ ही हिंदी में कुछ वीडियो भी डाले गए हैं। इसके माध्यम से लोगों को सही व्यायाम करने समेत अन्य जानकारियां हिंदी में मुहैया कराई गई हैं। उनकी ””हिंदी की कहावतें”” पुस्तक का विमोचन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल कर चुकी हैं। वह लोकगीतों को संरक्षित कर रहे हैं।


