बरेली

Bareilly News: बच्चों को दस्त के साथ पेशाब आए तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं

Connect News 24

बरेली। भीषण गर्मी में बच्चों की हालत बिगड़ रही है और अभिभावकों की अनदेखी उनकी जान पर भारी पड़ने लगी है। पिछले साल भी गंभीर हालत में सीवियर डायरिया की चपेट में आए पांच बच्चों की मौत हुई थी। डॉक्टर के मुताबिक बच्चों को दस्त के साथ पेशाब आए तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज बेहद जरूरी है।

मंगलवार को गंभीर हालत में एक बच्चे को लेकर परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। इलाज शुरू होने के दो घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। हेड नर्स रानी देवल के मुताबिक वह चार दिनों से डायरिया की चपेट में था। परिजन मेडिकल स्टोर से दवा दे रहे थे। ऐसे में हालत बिगड़ती रही। जब बच्चा इलाज के लिए पहुंचा तब तक डायरिया सीवियर हो गया था। ऐसे में उसे बचाया नहीं जा सका। कहा कि बच्चा वार्ड में भर्ती 28 बच्चे डायरिया की चपेट में हैं।

रानी देवल के मुताबिक दस दिन पहले भी आठ वर्षीय एक बच्ची को गंभीर हालत में लेकर परिजन पहुंचे थे। उसे तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था। जिला अस्पताल में बच्चों के लिए आईसीयू की सुविधा नहीं है। ऐसे में हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर करना पड़ता है।

हालत बिगड़ने लगे तो डॉक्टर को दिखाएं

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक डायरिया आमतौर पर सामान्य बीमारी है जो रोटा वायरस के कारण होती है। इसके अलावा साल्मोनेला, ई कोलाई जीवाणुओं से भी हो सकता है। असुरक्षित दवा के सेवन और आंतों में सूजन से भी होने की आशंका रहती है। इसमें पीड़ित को दस्त शुरू होते हैं। शरीर में पानी की ज्यादा कमी होने से किडनी प्रभावित होती है। खून का प्रवाह असामान्य होने लगता है। सही समय पर इलाज न मिले तो स्थिति गंभीर होने की आशंका रहती है। शरीर शिथिल पड़ जाता है।

वार्ड फुल, बेंच पर लिटाकर चढ़ाई डि्रप

जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बृहस्पतिवार को डायरिया की चपेट में रहे 28 बच्चे भर्ती थे। इसके अलावा अन्य बीमारियों से ग्रसित आठ बच्चे भी भर्ती थे। सभी बेड फुल होने के बाद जो बच्चे इलाज के लिए पहुंचे, उन्हें स्टाफ ने बेंच पर लिटाकर डि्रप चढ़ाई। सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक बच्चों की हालत गंभीर थी। स्टाफ ने रेफर किया था। आर्थिक स्थिति सही न होने से वे जाने को राजी नहीं थे। ऐसे में स्टाफ ने सीमित संसाधन में परिजनों की सहमति के बाद बच्चों को इलाज उपलब्ध कराया।


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