Bareilly News: अवैध यूनिपोल लगा विज्ञापन एजेंसिया बटोर रहीं माल
बरेली। शहर में यूनिपोल लगाने के नाम पर मोटी कमाई का खेल हमेशा से ही होता रहा है। विज्ञापन एजेंसियां चला रहे एक-दो लोगों का नगर निगम के अधिकारी और नेताओं से अच्छा तालमेल है। इसी के चलते नियमों को धता बताकर डिवाइडरों पर भी छोटे-छोटे यूनिपोल लगा दिए गए। बताया यह भी जा रहा है कि एक सड़क के डिवाइडर पर टेंडर फाइनल होने से पहले ही काम करा दिया गया है।
शहर की सड़कों पर अवैध होर्डिंग और यूनिपोल का जाल फैला है। ये कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। डायरेक्शन बोर्ड के नाम पर डिवाइडर और चौराहों पर यूनिपोल खड़े कर दिए गए और कार्रवाई के बजाय नगर निगम ने आंखें मूंद लीं। इससे निगम के खजाने को तो चूना लग ही रहा है, साथ ही शहर की जनता की जान भी जोखिम में है। धर्मकांटा चौराहे से डेलापीर होते हुए सौ फुटा रोड से सेटेलाइट चौराहे तक 55 से 60 यूनिपोल लगे हैं। बहुत से यूनिपोल लगाने का काम चल रहा है। डेढ़ से दो किमी सड़क पर 35 यूनिपोल लगे हैं।
टेंडर 50 यूनिपोल का, लगा दिए 250
एजेंसियों ने अनुमति तो 50 यूनिपोल की ली, लेकिन शहर में 200-250 यूनिपोल लगा दिए। एक यूनिपोल का 80 हजार रुपये शुल्क दिखा कर निगम में जमा करा दिए गए। मिलीभगत ऐसी रही कि एजेंसियों ने पूरे शहर में यूनिपोल के जाल फैला दिए। ये कमाई एजेंसी अकेले नहीं रखतीं। वे निगम के कर्ता-धर्ता को हिस्सा देती हैं। हर साल निगम बोर्ड और कार्यकारिणी बैठक के दौरान बजट में आय-व्यय का लेखा-जोखा पेश करते समय इससे जुड़े सवाल उठते हैं। डेढ़ से दो करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा जाता है और वह पूरा भी नहीं हो पाता है।



