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Bareilly News: उद्योगों को नहीं मिल रही जमीन, कहीं प्रशासनिक अड़चन

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बरेली। इन्वेस्टर्स समिट में निवेश करार के बावजूद कई उद्यमियों को अब तक जमीन ही मुहैया नहीं हो सकी है। जिन्हें जमीन मिली, उनके मामले धारा-80 या अन्य वजहों से तहसील में अटके हैं। इन सभी मामलों से पार पाने के बाद बीडीए का डेवलपमेंट चार्ज अड़चन बन रहा है।

जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भूमि उपलब्धता के लिए प्राप्त प्रस्ताव प्रशासन को भेज दिए गए हैं। जिले में प्लेज पार्क योजना के तहत औद्योगिक पार्क के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास है। इसके लिए कुछ निवेशकों से बातचीत भी चल रही है। संयुक्त आयुक्त उद्योग सर्वेश्वर शुक्ला के मुताबिक प्लेज पार्क उद्योगों की स्थापना के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। जिन उद्यमियों के प्रोजेक्ट भूमि उपलब्ध न होने से अटके हैं, वे भी इस प्रोजेक्ट में निवेश कर सकते हैं। स्टांप डयूटी से छूट, एक फीसदी ब्याज दर पर लोन, प्लेज पार्क डेवलपमेंट के लिए प्रति एकड़ पांच लाख रुपये डेवलपमेंट चार्ज व अन्य सुविधाएं सरकार की ओर से प्रदान की जाएंगी।

निवेश मित्र पोर्टल पर अभी 22 प्रकरण लंबित हैं। इसमें भूमि उपलब्ध कराने की मांग समेत बरेली विकास प्राधिकरण, अग्निशमन और प्रदूषण विभाग से एनओसी, तहसीलों में भूमि विवाद के लंबित प्रकरण, धारा-80 लैंड यूज चेंज आदि के मामले शामिल हैं।

ये आ रहीं अड़चनें

– जमीन की खरीद से दो गुना डेवलपमेंट चार्ज।

– प्रस्तावित उद्योग के सामने नौ मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्यता।

– बाउंड्री की ऊंचाई अधिकतम पांच फुट।

– अग्निशमन के लिए 50 हजार से एक लाख लीटर क्षमता का पानी का टैंक।

– औद्योगिक पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि उपलब्धता।

– बिजली आपूर्ति, भूगर्भ जल दोहन के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता।

उद्यमियों का दर्द

चार करोड़ के निवेश का करार हुआ था पर अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है। प्रकरण प्रशासन के पास लंबित है। – सलिल बंसल, उद्यमी

इन्वेस्टर्स समिट में 135 करोड़ के निवेश का करार हुआ था। प्रशासन से लीज पर भूमि उपलब्ध कराने की मांग है। – आरके यादव, उद्यमी

डेयरी प्रोजेक्ट स्थापना के लिए दस करोड़ का करार हुआ था। धारा-80 निपट गया, अब मिट्टी भराई की समस्या है। – पंकज राघव, उद्यमी

एमएसएमई के तहत पांच करोड़ के निवेश से स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना है। डेवलपमेंट चार्ज की अड़चन है। – अनंत अग्रवाल, उद्यमी


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