Bareilly News: गैंगवार करने वाले दोनों गुटों के बनाए जा रहे भूमाफिया गिरोह
बरेली। पांच महीने पहले तीन लोगों की हत्या से कटरी दहलाने वाले भूमाफिया अब मुकदमों के अलावा कानूनी रूप से पाबंद होकर निगरानी के दायरे में आ जाएंगे। एसएसपी ने इनके दो नए गैंग पंजीकृत करने का निर्देश दिया है। इसके लिए कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। एक-दो दिन में दोनों नए गैंग पंजीकृत कर दिए जाएंगे।
11 जनवरी की शाम को फरीदपुर की कटरी में तिहरा हत्याकांड हुआ था। जमीन पर कब्जे को लेकर गोलियां तड़तड़ाई थीं। सुरेश प्रधान पक्ष के एक और परमवीर सिंह पक्ष के दो लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग घायल हुए थे। पता लगा था कि सरकारी और किसानों की जमीन पर कब्जे को लेकर ही दोनों गुटों में संघर्ष हुआ था।
इस मामले में परमवीर सिंह और सुरेश प्रधान पक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों मामलों की विवेचना में कई और लोगों को नामजद किया था। दोनों ही पक्षों के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई थी। इनमें से अधिकतर लोग जेल में हैं।
अब एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने इन दोनों गुटों के भूमाफिया श्रेणी के दो नए गैंग रजिस्टर्ड करने का निर्देश दिया है। सुरेश प्रधान को एक गिरोह का सरगना मानकर करीब 20 लोगों को गिरोह का सदस्य माना गया है। वहीं परमवीर सिंह को दूसरे गुट का सरगना माना गया है। इस गिरोह में भी पांच से छह सदस्य शामिल किए जा रहे हैं। दोनों गुटों में वही लोग सदस्य के तौर पर हैं, जिनके खिलाफ चार्जशीट लगाए गई थी।
दो महीने में 21 नए गिरोह कराए पंजीकृत
डीसीआरबी के रिकॉर्ड में इस समय 179 गिरोह जिले में पंजीकृत हैं। इनमें कटरी कांड के दो नए भूमाफिया गिरोह जुड़ने से संख्या 181 हो जाएगी। डीसीआरबी की वर्षों पहले स्थापना हुई थी। तब से आज तक जिले में 158 गिरोह ही पंजीकृत थे। अब एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने दो महीने में 21 नए गिरोह पंजीकृत करा दिए हैं। दो और गिरोह के साथ ये संख्या 23 होने वाली है।
गोकशी करने वालों पर सबसे बड़ी कार्रवाई
एसएसपी ने जो नए 21 गैंग पंजीकृत किए हैं, उनमें से 18 गोकशी करने वाले आरोपियों से संबंधित हैं। इन सभी गिरोह में 58 गो तस्कर हैं। इनमें से अधिकतर को जेल भेज दिया गया है, कुछ की धरपकड़ की जा रही है। इसके अलावा एलायंस ग्रुप के निदेशकों का भूमाफिया गिरोह, भोजीपुरा का बिजली चोर गैंग और बिथरी में लुटेरों का गैंग पंजीकृत किया गया है।
गिरोह पंजीकृत करने के फायदे
गिरोह पंजीकृत करने से संबंधित सरगना व सदस्यों की निगरानी का एक अलग तंत्र विकसित हो जाता है। रिकॉर्ड में पुलिस को इन गिरोहों के बारे में समय-समय पर स्थिति दर्ज करनी पड़ती है। दूसरे थानों और जिलों में भी गिरोह के बारे में जानकारी आसानी से उपलब्ध रहती है। इस लिहाज से गिरोह के लोगों की धरपकड़ भी आसान रहती है।
नए गिरोह लगातार पंजीकृत किए जा रहे हैं। भूमाफिया से लेकर पशु तस्करों तक की निगरानी की जा रही है। नए गिरोह बनाने के साथ ही पुराने गिरोह के सदस्यों की सक्रियता भी पुलिस लगातार परख रही है। – प्रभाकर चौधरी, एसएसपी



