Bareilly News: तर्पण और श्राद्ध कर पितरों को करें खुश, मिलेगा आशीर्वाद

पं. अरुण कुमार शुक्ला
शाहजहांपुर। पितृपक्ष की शुरूआत 29 सितंबर से हो रही है। इन दिनों पूर्वजों और पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इन दिनों मृत्यु लोक से पितृ धरती लोक पर आते हैं। तर्पण और श्राद्ध करने से पितर खुश होते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं। इन दिनों पिंडदान करने की भी मान्यता है। कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 अक्तूबर को पितृपक्ष की समाप्ति होगी।
पं. अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरूआत होती है। यह आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक रहती है। बताया कि पितृ पक्ष में तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध करना बेहद शुभ माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति और पितरों की शांति के लिए पितृपक्ष पर दान और ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
पितृपक्ष पूजा के लिए जरूरी सामग्री व विधि
सबसे पहले साफ-सुथरे स्थान पर कुश का आसन बिछाकर उस पर बैठें। कुश का आसन न मिले तो कंबल का आसन बना सकते हैं। बैठते समय कुशा का अगला भाग पूर्व दिशा की ओर रखें। आपके पास एक लोटे में जल, तांबे की थाली या प्लेट, कच्चा दूध, फूलमाला, कुश, अर्पित करने के लिए सफेद फूल, जनेऊ, जौ, सुपारी, कुछ सिक्के (पैसे), काले तिल, कच्चे चावल होने चाहिए। आसन पर बैठकर तीन बार आचमन (अर्घा से लोटे से जल हथेली में ले और पी लें) करें। ओम केशवाय नम:, ओम माधवाय नम:, ओम गोविंदाय नम: तीनों बार आचमन के साथ बोलें। आचमन के बाद हाथ धो लें और अपने ऊपर जल छिड़कें। बैठते समय अपना मुख पूर्व दिशा की तरफ रखें।
ऐसे करें पितरों को तर्पण
अपने हाथों की अंजली बनाएं और अपने गोत्र का नाम लें, पिता का नाम लें और उन्हें तीन बार जल अर्पित कर तर्पण दें। इसी तरह तीन बार दादाजी को, तीन बार दादाजी के पिताजी को तर्पण दें। फिर अपने दादाजी के गोत्र का नाम लें, अपनी दादी का नाम लें और उन्हें तर्पण दें। परदादी को तर्पण देते समय दादाजी के गोत्र का नाम लें, परदादी का नाम लें और तीन बार इसी तरह तर्पण दें। इसके बाद तीन बार अपने नानाजी को तर्पण दें। नानाजी के गोत्र का नाम लें, नानाजी का नाम लें और जल से तर्पण दें। फिर नानाजी के पिताजी को भी इसी प्रकार तर्पण दें। आप अपने स्वर्गवासी परिजनों को इसी प्रकार तर्पण दे सकते हैं। अक्सर ऐसा भी होता है जब अपने परदादा, परदादी या नानाजी के पापा और नानीजी के पापा का नाम नहीं पता होता। ऐसे में रुद्र, विष्णु और ब्रह्मदेव का नाम लेकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें। गोबर के उपले या कंडे पर गाय के घी और गुड़ की धूप करें और पांच भोग निकालें, ये पांच भोग पंचग्रास कहलाते हैं।
इन तिथियों में होंगे श्राद्ध
29 सितंबर पूर्णिमा श्राद्ध
30 सितंबर प्रतिपदा और द्वितीय श्राद्ध,
01 अक्तूबर तृतीया श्राद्ध
02 अक्तूबर चतुर्थी श्राद्ध
03 अक्तूबर पंचमी श्राद्ध
04 अक्तूबर षष्ठी श्राद्ध
05 अक्तूबर सप्तमी श्राद्ध
06 अक्तूबर अष्टमी श्राद्ध
07 अक्तूबर नवमी श्राद्ध
08 अक्तूबर को दशमी श्राद्ध
09 अक्तूबर को एकादशी श्राद्ध
11 अक्तूबर को द्वादशी श्राद्ध
12 अक्तूबर को त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्तूबर को चतुर्दशी
14 अक्तूबर को सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध
सात अक्तूबर से शुरू होगी श्रीमद्भागवत पितृ मोक्ष यज्ञ कथा
शाहजहांपुर। उस्मान बाग स्थित श्री रुद्र बालाजी धाम मंदिर में सात से 14 अक्तूबर तक अनुष्ठान होगा। इसमें अपने मृतक बंधु बांधवों, परिजनों के मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत के 18000 श्लोकों एवं पितृ गायत्री मंत्र, पितृ स्त्रोत्र, तर्पण, हवन, भंडारा सहित अपने पूर्वजों पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए अनुष्ठान में प्रतिभाग किया जा सकता है। मंदिर के पुजारी केके शास्त्री ने बताया कि 15 अक्तूबर को पितृ विसर्जन 16 दीपों के द्वारा दीप यज्ञ किया जाएगा एवं भंडारा होगा। संवाद
तिथि अज्ञात होने पर अमावस्या के दिन करें श्राद्ध : डॉ. करुणाशंकर
शाहजहांपुर। श्री दैवी संपद् ब्रह्मचर्य संस्कृत महाविद्यालय में बुधवार को बैठक हुई। इसमें श्राद्ध पक्ष को लेकर चर्चा की गई। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. करुणाशंकर तिवारी ने बताया कि आस्था से किया गया श्राद्ध कल्याणकारी होता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को भोजन, तर्पण, गरीबों को दान, पशुओं को चारा प्रदान आदि कराना चाहिए। जो मनुष्य श्राद्ध तर्पण कार्य नहीं करता, उसे अनेक प्रकार के कष्ट उठाने पड़ते हैं क्योंकि पुत्र पिता की आत्मा होता है। तिथि अज्ञात होने पर अमावस्या के दिन श्राद्ध करना चाहिए। संवाद



