Bareilly News: ओ और एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप खत्म, मरीजों पर मंडराया संकट
बरेली। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को अगर निगेटिव ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़े तो जान खतरे में पड़ने की आशंका है। वजह, ब्लड बैंक में ओ और एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप खत्म हो चुका है। ए और बी निगेटिव भी एक-एक यूनिट शेष है। विषम परिस्थिति में मरीजों को रक्त मुहैया कराने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन 14 जून को कार्यालय परिसर में रक्तदान शिविर आयोजित कर रहा है। लोगों से बढ़चढ़कर रक्तदान की अपील है।
ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक निगेटिव ब्लड ग्रुप खत्म होने के बाद जिन मरीजों के तीमारदार पहुंच रहे हैं, उन्हें रक्तदाता साथ लाने काे कहा जा रहा है, ताकि रक्त लेकर उसकी जांच आदि के बाद सुरक्षित रक्त तत्काल उन्हें उपलब्ध कराया जा सके। संबंधित ग्रुप के रक्तदाता न मिलने पर स्वैच्छिक रक्तदाता संगठन के पदाधिकारियों को कॉल कर जरूरतमंद की मदद की अपील की जाती है।
किसी भी तरह से मरीज की मदद का प्रयास होता है, ताकि रक्त के अभाव में मरीज की सांस न थमे। बताया कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अक्सर ऐसे मरीज पहुंचते हैं जो दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। जो तत्काल अपने परिजन के बारे में जानकारी नहीं दे पाते, ऐसी स्थिति में उन्हें रक्त मुहैया कराने के लिए भी प्रयास करने पड़ते हैं। इसके अलावा प्रसव के दौरान रक्त की कमी होने पर भी रक्त मुहैया कराया जाता है।
दस रक्तदाता संगठन जो बचाते हैं अनजान की जान
संत निरंकारी मंडल, गुरु सिंह सभा, एचएन द्विवेदी इंटर कॉलेज हाफिजगंज, सृजन सेवा समिति आंवला, रुहेलखंड विश्वविद्यालय एनएसएस, नाथ नगरी सेवा समिति, सिविल डिफेंस, काया बंधू सोसायटी, बीयर जिम प्रमुख रूप से अनजान की जान बचाने के रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन ने सभी संगठनों से विषम परिस्थिति से निपटने के लिए 14 जून को रक्तदान की अपील है।
बनते हैं नए ब्लड सेल्स
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. एके सचान के मुताबिक रक्त देने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं होती, बल्कि रक्तदान से नए ब्लड सेल्स बनते हैं। साथ ही, आयरन के बढ़ने से होने वाले जोखिम से भी निजात मिलती है। बताया कि रक्तदान के बाद फ्लूड की कमी महज 24-48 घंटे में पूरी हो जाती है। ब्लड सेल सात दिन में और आयरन की कमी तीन माह में पूरी हो जाती है।
रक्तदान के फायदे
– रक्तचाप, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी-सी, मलेरिया आदि की निशुल्क जांच।
– बोनमेरो बनने की दर बढ़ती है, खून के थक्के बनने की आशंका से निजात।
– नियमित रक्तदान से पांच फीसदी कम होता है हार्ट अटैक का खतरा।
यह लोग कर सकते हैं रक्तदान
– 18 से 60 साल तक की उम्र के स्वस्थ लोग।
– जिनका हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम डेसीलीटर या अधिक हो।
– 45 किलो से अधिक वजन के महिला-पुरुष।
किस ग्रुप का कितने यूनिट बचा है रक्त
ब्लड गुप यूनिट
ए पॉजिटिव 03
बी पॉजीटिव 28
एबी पॉजिटिव 02
ओ पॉजिटिव 14
ए निगेटिव 01
बी निगेटिव 01
ओ निगेटिव 00
एबी निगेटिव 00



